5 लाख रुपये महीने का किराया देने को तैयार अमीर लोग, क्या है प्रॉपर्टी में निवेश न करने के पीछे का गणित? व्यापार 2 महीने पहले 77
अभिनेत्री करिश्मा कपूर के फ्लैट के भारी-भरकम किराये ने एक नई बहस छेड़ दी है। बड़े रईस लोग घर खरीदने के बजाय किराये पर रहना क्यों पसंद कर रहे हैं, इसके पीछे का आर्थिक तर्क बेहद दिलचस्प है।

किराये पर रहने का अनोखा ट्रेंड

हाल ही में मशहूर अभिनेत्री करिश्मा कपूर के मुंबई स्थित लग्जरी अपार्टमेंट के किराये की चर्चा ने हर किसी को हैरान कर दिया है। इस फ्लैट के लिए हर महीने 5.51 लाख रुपये का किराया वसूला जा रहा है। इससे पहले भी जब यह फ्लैट किराये पर दिया गया था, तब इसका वार्षिक किराया 1 करोड़ रुपये से अधिक था, जबकि इस बार यह आंकड़ा करीब 70 लाख रुपये प्रति वर्ष के स्तर पर है। इतनी बड़ी रकम का किराया सुनकर आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि लोग आखिर घर खरीदने के बजाय लाखों रुपये रेंट पर क्यों खर्च कर रहे हैं।

निवेश का बदलता नजरिया

धनी वर्ग, बड़े व्यवसायी और फिल्मी सितारे किसी भी संपत्ति को खरीदने या किराये पर लेने का फैसला आम लोगों की तरह केवल रहने की जरूरत के आधार पर नहीं करते। उनके लिए घर सिर्फ एक छत नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट होता है। इन लोगों के लिए आर्थिक लाभ और निवेश की रणनीति सबसे ऊपर होती है। यदि उन्हें यह लगता है कि करोड़ों रुपये किसी एक अचल संपत्ति में ब्लॉक करने की तुलना में उस पूंजी को कहीं और निवेश करना अधिक फायदेमंद है, तो वे लाखों रुपये महीने का किराया देना खुशी-खुशी स्वीकार कर लेते हैं।

क्यों नहीं खरीदते घर?

  • पूंजी का सही प्रबंधन: रईस लोग अपनी पूंजी को ऐसी जगहों पर निवेश करते हैं जहाँ से उन्हें अधिक रिटर्न मिलने की संभावना हो। घर खरीदने का मतलब है करोड़ों रुपये का निवेश एक ही जगह फंस जाना।
  • फ्लेक्सिबिलिटी का फायदा: किराये पर रहने से उन्हें अपनी सुविधा और काम के अनुसार शहर या इलाका बदलने की आजादी रहती है। उन्हें संपत्ति की मेंटेनेंस और टैक्स जैसे झंझटों से भी मुक्ति मिलती है।
  • कैश फ्लो का गणित: बड़े निवेशक हमेशा अपने पास लिक्विड कैश या ऐसी संपत्तियों को रखना चाहते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर आसानी से भुनाया जा सके।

संक्षेप में, अमीर लोगों के लिए घर का चुनाव केवल भावना या रहने की सुविधा से नहीं, बल्कि रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट और कैश फ्लो के ठोस गणित से तय होता है। उनके लिए लाखों रुपये का किराया देना 'बेवकूफी' नहीं, बल्कि एक सोची-समझी स्मार्ट मूव रणनीति का हिस्सा है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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