नर्मदापुरम में वज्रपात से सुरक्षा के लिए 'प्रोजेक्ट दामिनी' की शुरुआत, 'इलेक्ट्रा' शुभंकर के जरिए फैलेगी जागरूकता मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 64
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं से लोगों को बचाने और जनहानि कम करने के लिए जिला प्रशासन, यूनिसेफ और आपदा प्रबंधन संस्थान ने मिलकर एक विशेष अभियान शुरू किया है।

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मानसून के आगमन से पहले आकाशीय बिजली (वज्रपात) के खतरे से निपटने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया गया है। शुक्रवार को जिला प्रशासन, यूनिसेफ मध्यप्रदेश और आपदा प्रबंधन संस्थान (DMI) के संयुक्त तत्वावधान में 'प्रोजेक्ट दामिनी-नर्मदापुरम जिला लाइटनिंग सेफ्टी कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम' का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक जीवनरक्षक जानकारी पहुंचाना, लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और आपदा के प्रति उनकी तैयारियों को मजबूत करना है। कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया और आकाशीय बिजली जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदा से खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।

सुरक्षा के लिए अनूठा शुभंकर 'इलेक्ट्रा' और तकनीक का मेल

इस अभियान को बच्चों और आम लोगों के लिए सरल और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक विशेष बाल-अनुकूल शुभंकर (मैस्कॉट) का अनावरण किया है, जिसका नाम 'इलेक्ट्रा' रखा गया है। 'इलेक्ट्रा' के माध्यम से बच्चों और ग्रामीणों को खेल-खेल में आकाशीय बिजली से बचने के आसान और बेहद प्रभावी तरीकों के बारे में सिखाया जाएगा।

इस अवसर पर यूनिसेफ मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख विलियम हैनलॉन ने जिला प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली अधिकांश मौतों को थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से रोका जा सकता है। हैनलॉन के अनुसार, समय पर सटीक चेतावनी मिलना, समुदाय का जागरूक होना और स्थानीय नेतृत्व का सक्रिय सहयोग बेहद जरूरी है। यदि ये तीनों कड़ियां आपस में मिल जाएं, तो यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रत्येक चेतावनी अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे और हर परिवार सुरक्षित रहने के उपायों को अमल में ला सके।

तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव: जिलाधिकारी सोमेश मिश्रा

नर्मदापुरम के जिलाधिकारी सोमेश मिश्रा ने इस अभियान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी आपदा से निपटने की तैयारी उसके आने से पहले ही शुरू हो जानी चाहिए। 'प्रोजेक्ट दामिनी' इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत जिले के विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर 'लाइटनिंग मित्रों' को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मित्रों की जिम्मेदारी होगी कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली हर चेतावनी और जीवनरक्षक जानकारी को जिले के हर गांव और ढाणी तक पहुंचाएं ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

दामिनी ऐप और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

यूनिसेफ मध्यप्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने इस अभियान में तकनीक के सही इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने 'दामिनी लाइटनिंग अलर्ट ऐप' के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक तभी प्रभावी होती है जब लोग उसके बारे में पूरी तरह जागरूक हों और चेतावनी मिलने पर तुरंत सही कदम उठाएं। इसलिए, लोगों को इस ऐप को डाउनलोड करने और इसके संदेशों को समझने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

भोपाल स्थित आपदा प्रबंधन संस्थान (DMI) के तकनीकी विशेषज्ञ अभिषेक मिश्रा ने परियोजना की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि इसके तहत कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:

  • 'दामिनी ऐप' का व्यापक प्रचार-प्रसार करना ताकि हर मोबाइल धारक तक इसकी पहुंच हो।
  • गांवों में स्थानीय स्वयंसेवकों को 'लाइटनिंग मित्र' के रूप में प्रशिक्षित करना।
  • स्कूलों में बच्चों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित करना।
  • ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों को सक्रिय कर पूर्व-तैयारियों को मजबूत करना।

परंपरा और तकनीक के तालमेल से चलेगा अभियान

अधिकारियों के अनुसार, 'प्रोजेक्ट दामिनी' के तहत समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की योजना है। इस अभियान में विशेष रूप से खेतों में काम करने वाले किसानों, खुले में रहने वाले चरवाहों, स्कूली विद्यार्थियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और ग्रामीण महिलाओं को लक्षित किया जाएगा। जागरूकता फैलाने के लिए पारंपरिक माध्यमों जैसे नुक्कड़ नाटक, दीवार लेखन और ग्राम सभाओं के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और मोबाइल संदेशों का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा ताकि मानसून के दौरान वज्रपात से होने वाले नुकसान को शून्य पर लाया जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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