प्रियंका गांधी के नाम पर एआई का जाल, फर्जी वीडियो और आवाज से ठगी की साजिश का खुलासा राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 3
वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगों द्वारा लोगों से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है, जिसके बाद उनके कार्यालय ने एक आधिकारिक चेतावनी जारी की है।

साइबर ठगों का नया हथकंडा

आजकल के डिजिटल युग में साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए तकनीक का एक खतरनाक रास्ता चुन लिया है। हाल ही में वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम का सहारा लेकर लोगों को ठगने की कोशिश की गई है। अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से प्रियंका गांधी की फोटो और उनकी आवाज का हूबहू नकल तैयार कर रहे हैं। इन फर्जी वीडियो के जरिए आम जनता को लुभावने निवेश का झांसा दिया जा रहा है, जिससे लोग बड़ी आसानी से उनके जाल में फंस सकते हैं। इस गंभीर मामले को लेकर प्रियंका गांधी के कार्यालय ने गहरी चिंता व्यक्त की है।

कार्यालय द्वारा जारी चेतावनी

प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक आधिकारिक स्कैम अलर्ट जारी किया है। कार्यालय की ओर से बताया गया है कि व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर प्रियंका गांधी के फर्जी वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। इन वीडियो में एआई तकनीक का उपयोग करके उनकी आवाज और दृश्य तैयार किए गए हैं, जिनमें लोगों से किसी विशेष योजना में निवेश करने का आग्रह किया गया है।

कार्यालय ने जनता को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि ये सभी वीडियो पूरी तरह से फर्जी हैं और इनका उद्देश्य केवल लोगों की गाढ़ी कमाई लूटना है। आम नागरिकों से यह सख्त अपील की गई है कि वे इस तरह के किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। इसके अलावा, लोगों से यह भी कहा गया है कि यदि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसी कोई पोस्ट दिखाई दे, तो तुरंत उसे रिपोर्ट करें और संबंधित अकाउंट को ब्लॉक करें ताकि अन्य लोग ठगी का शिकार होने से बच सकें।

निर्मला सीतारमण का मामला और फर्जीवाड़े का पैटर्न

प्रियंका गांधी के नाम पर हो रही यह ठगी कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले अगस्त महीने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम का इस्तेमाल करके भी ऐसा ही एक फर्जी निवेश वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस वीडियो में यह भ्रामक दावा किया गया था कि मात्र 22 हजार रुपए के शुरुआती निवेश के जरिए कोई भी व्यक्ति हर हफ्ते साढ़े पांच लाख रुपए तक की कमाई कर सकता है।

उस समय सरकार ने इस वीडियो का कड़ा संज्ञान लिया था। पीआईबी यानी प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने अपनी विस्तृत जांच में यह पुष्टि की थी कि वह वीडियो पूरी तरह से बनावटी था और उसे एआई तकनीक से तैयार किया गया था। पीआईबी ने स्पष्ट किया था कि वित्त मंत्री ने ऐसी किसी भी निवेश योजना का न तो समर्थन किया है और न ही वे किसी ऐसे प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं। उस घटना ने देश भर में ऐसे स्कैम्स के खिलाफ एक बड़ी बहस छेड़ दी थी, जिसमें फर्जी योजनाओं का लालच देकर लोगों को निशाना बनाया जाता है।

कैसे बचें एआई आधारित स्कैम से

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल ठग लोगों का भरोसा जीतने के लिए जानी-मानी हस्तियों और बड़े नेताओं का चेहरा और आवाज इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • यदि कोई वीडियो आपको रातों-रात अमीर बनने या बहुत ज्यादा मुनाफे का लालच दे रहा है, तो सतर्क हो जाएं।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पूरी तरह बचें।
  • किसी भी निवेश योजना में अपनी पूंजी लगाने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर पूरी जानकारी हासिल करें।
  • सरकारी योजनाओं या नेताओं के बयानों की पुष्टि हमेशा उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या वेबसाइट से ही करें।

साइबर अपराधों का यह नया रूप बेहद घातक है, क्योंकि एआई के जरिए बनी चीजें इतनी असली लगती हैं कि सामान्य व्यक्ति के लिए उनमें अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जागरूकता ही इन ठगों से बचने का एकमात्र हथियार है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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