प्रतापगढ़: तस्कर भाइयों के साम्राज्य पर चला बुलडोजर, करोड़ों के आलीशान फार्म हाउस किए गए ध्वस्त राजस्थान एक महीने पहले 57
राजस्थान के प्रतापगढ़ में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्कर भाइयों द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए फार्म हाउस को जमींदोज कर दिया है। आरोपी भाई मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में पहले से ही जेल में बंद हैं।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ एक्शन

प्रतापगढ़ जिले के देवेल्दी गांव में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तस्कर भाइयों याकूब और जमशेद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों ने अवैध रूप से बनाए गए एक आलीशान फार्म हाउस को बुलडोजर से ढहा दिया। यह निर्माण करीब दो बीघा सरकारी जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति के किया गया था।

जेल में बंद हैं आरोपी

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी याकूब और जमशेद पहले से ही नशीले पदार्थों की तस्करी के गंभीर मामलों में जेल में बंद हैं। याकूब को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के चिकलाना में पकड़ी गई एमडी फैक्ट्री के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसका भाई जमशेद पिपलोदा इलाके के एमडी फैक्ट्री केस में पकड़ा गया था। जेल में रहने के दौरान ही प्रशासन ने उनकी संपत्तियों की जांच शुरू की थी।

प्रशासन का सख्त संदेश

जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने अवैध धंधों से अर्जित धन से यह निर्माण खड़ा किया था। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि केवल संपत्तियों को फ्रीज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीन पर बने हर निर्माण को हटाया जाएगा। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम मौजूद रही ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

तस्करों के नेटवर्क में खलबली

देवेल्दी गांव में हुई इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने इलाके के अन्य तस्करों में हड़कंप मचा दिया है। प्रतापगढ़ में प्रशासन अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ निरंतर अभियान चला रहा है। स्थानीय प्रशासन का यह संदेश स्पष्ट है कि तस्करी के जरिए खड़ी की गई संपत्तियां अब सुरक्षित नहीं हैं और भविष्य में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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