महाराष्ट्र में भारी बारिश का कहर: पुणे में भूस्खलन से एक की मौत, मुंबई में रेड अलर्ट के बीच थमी रफ्तार, विधानसभा सत्र स्थगित होने से सियासी संग्राम तेज महाराष्ट्र 2 महीने पहले 82
महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई है, जहां पुणे के पाटन गांव में हुए भूस्खलन में एक व्यक्ति की मौत हो गई, वहीं मुंबई में रेड अलर्ट के चलते जनजीवन ठप हो गया है और इस पर तीखी राजनीति शुरू हो गई है।

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश ने इस समय भारी तबाही मचा रखी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित पुणे, पालघर, और रायगढ़ जैसे बड़े जिलों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही बारिश और इससे जुड़ी अलग-अलग दुर्घटनाओं में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। प्राकृतिक संकट के इस माहौल के बीच अब राज्य में राजनीतिक पारा भी काफी चढ़ गया है। पुणे के मावल तहसील के पाटन गांव में भारी बारिश के बाद सोमवार को हुए एक भयानक भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें एक पूरा घर मलबे के नीचे दब गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

पुणे के पाटन गांव में भारी तबाही: मलबे में तब्दील हुआ आशियाना

पुणे जिले के अंतर्गत आने वाली मावल तहसील के दूरदराज पाटन गांव में सोमवार का दिन एक बड़ा हादसा लेकर आया। यहां मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसक कर सीधे एक घर पर आ गिरा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अनुसार, इस हादसे में घर पूरी तरह से तबाह हो गया। पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोम्पे ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण इस सुदूर गांव में तीन अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं।

इनमें से एक घटना में भारी मलबे की चपेट में आने से एक घर पूरी तरह से जमींदोज हो गया। गजानन टोम्पे ने बताया कि सोमवार की अलसुबह जब यह भूस्खलन हुआ, उस वक्त घर के भीतर कुल तीन लोग सो रहे थे। हादसे की सूचना मिलने के तुरंत बाद बचाव दल को रवाना किया गया। NDRF के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मलबे से अब तक एक व्यक्ति का शव सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि दो अन्य लापता लोगों को तलाशने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। NDRF, स्थानीय पुलिस और ग्राम स्तर के स्वयंसेवी समूहों की टीमें इस खोज और बचाव अभियान में मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।

मावल तहसील में ही एक अन्य घटना में NDRF की टीम ने अपनी सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टाल दिया। मूसलाधार बारिश की वजह से घोरावाडी रेलवे स्टेशन के पास भारी जलभराव हो गया था, जिसके चलते एक निजी यात्री बस पानी के बीचों-बीच फंस गई। खतरे को भांपते हुए राहत दल ने तुरंत मोर्चा संभाला और बस के भीतर फंसे सभी 37 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

मुंबई में रेड अलर्ट की स्थिति: थम गई रफ्तार और बंद किए गए स्कूल-कॉलेज

मुंबई में बीते तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने महानगर की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। शहर के अलग-अलग कोनों से पेड़ गिरने, दीवारों के ढहने और घरों के कुछ हिस्सों के गिरने की भयानक खबरें आ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल पिछले तीन दिनों में ही मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में विभिन्न हादसों की वजह से एक दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, शहर के विभिन्न हिस्सों में 100 से ज्यादा स्थानों पर विशालकाय पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे यातायात और बिजली आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है।

BMC की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 7 जुलाई की सुबह 8:00 बजे से लेकर 8 जुलाई की सुबह 8:00 बजे तक के 24 घंटों के भीतर विक्रोली, मालवणी, बोरीवली, चिंचोली और डिंडोशी सहित कई उपनगरीय इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ 200 से लेकर 250 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई है। इस अत्यधिक बारिश की वजह से निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके साथ ही, दोपहर के समय करीब 4 बजे समुद्र में 4.16 मीटर यानी लगभग 13 फीट ऊंची हाई टाइड आने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते प्रशासन अत्यधिक सतर्क है। मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई के लिए रेड अलर्ट जारी कर रखा है। IMD के डीडीजी बिक्रम सिंह ने बताया कि मुंबई में जून के महीने में हुई बारिश की कमी अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। चालू सीजन में अब तक सामान्य से करीब 60 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि बुधवार से बारिश की रफ्तार में कुछ कमी आ सकती है, जिसके बाद रेड अलर्ट को घटाकर येलो अलर्ट में बदला जा सकता है। वर्तमान में गंभीर स्थिति को देखते हुए मुंबई और पूरे MMR क्षेत्र के स्कूल और कॉलेजों को पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है, जबकि कई सरकारी कार्यालयों को ऑनलाइन काम करने की सलाह दी गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर असर और विधानसभा सत्र का स्थगन

इस मूसलाधार बारिश का सबसे बड़ा असर महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र पर भी देखने को मिला। सोमवार को मुंबई की सड़कों और रेल पटरियों पर पानी भरने की वजह से कई विधायक और मंत्री समय पर विधानसभा भवन नहीं पहुंच पाए। इसके चलते सदन की कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। नतीजतन, विधानसभा की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।

इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की बात करें तो मुंबई पुणे मिसिंग लिंक परियोजना के पास भारी चट्टानें खिसक गईं। इस मिसिंग लिंक की नवनिर्मित टनल के भीतर पानी का गंभीर रिसाव भी देखने को मिला। इस घटना के बाद से राज्य में राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप मढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इसे एक अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा बताकर अपना बचाव कर रहा है और विपक्ष पर केवल राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।

विपक्ष के तीखे प्रहार: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर घेरी सरकार

विपक्षी दलों ने इस आपदा के बाद सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के दम पर जल्दबाजी में मिसिंग लिंक परियोजना का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश ने इनके दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उनके समय में बना बांद्रा-वर्ली सी-लिंक आज भी बिना किसी समस्या के मजबूती से खड़ा है, जबकि मौजूदा सरकार के विकास के बड़े-बड़े दावे पहली ही बारिश के पानी में बह गए हैं।

वहीं, कांग्रेस के ही विधायक अमीन पटेल ने आरोप लगाया कि शहर में पेड़ गिरने, खुले मैनहोल के हादसों, चॉल के ढहने और लोगों की असमय हो रही मौतों के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और BMC की लापरवाही जिम्मेदार है। प्रशासन को पहले से इन सब खतरों का आकलन करना चाहिए था।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव ने भी इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर व्यापक भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से ही आज पूरे महाराष्ट्र को इस तरह की दयनीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का उद्घाटन महज तीन महीने पहले बड़ी धूमधाम से किया गया था, पहली ही बारिश में उसकी हकीकत दुनिया के सामने आ गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस घटिया निर्माण के लिए जनता को जवाब देना चाहिए।

सरकार का करारा पलटवार: आपदा को बताया प्राकृतिक

विपक्ष के इन चौतरफा हमलों पर सरकार की ओर से भी त्वरित प्रतिक्रिया आई है। भारतीय जनता पार्टी की नेता और सड़क निर्माण एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मिसिंग लिंक परियोजना इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ और बेहद जटिल नमूना है, जिसका नाम बकायदा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह एक अप्रत्याशित और अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इसके बावजूद पूरी सरकार और जिला प्रशासन पूरी ताकत से जमीन पर उतरे हुए हैं और हर एक स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर है।

बीजेपी नेता राम कदम ने भी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि मुंबई भौगोलिक रूप से एक आइलैंड सिटी यानी द्वीपीय शहर है, और ऐसी भौगोलिक स्थिति में हाई टाइड के दौरान जल निकासी की प्रक्रिया प्रभावित होना पूरी तरह से स्वाभाविक है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जमीनी हकीकत जाने बिना केवल सस्ती राजनीति करने में जुटे हुए हैं।

इसके अलावा, बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि जहां कहीं भी मानवीय लापरवाही या कोताही पाई जाएगी, वहां दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन एक प्राकृतिक आपदा के लिए सीधे सरकार को कसूरवार ठहराना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।

महायुति सरकार का हिस्सा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक ने भी इस पर अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि प्रशासन को जमीनी स्तर पर अपनी कार्यप्रणाली में और सुधार करने की जरूरत है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय राहत और बचाव का कार्य बहुत तेजी से चल रहा है और इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी दल को राजनीति नहीं करनी चाहिए।

वर्तमान में मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश का दौर निरंतर जारी है। आज शहर में पूरी तरह से रेड अलर्ट लागू है। हालांकि, मौसम विभाग की ओर से यह राहत भरी उम्मीद जताई गई है कि कल से बारिश का जोर कुछ हद तक कम हो सकता है और चेतावनी को घटाकर येलो अलर्ट में तब्दील किया जा सकता है। लेकिन इस वार्षिक आपदा ने एक बार फिर हमारे शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब जल निकासी व्यवस्था और मानसून पूर्व प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी गूंज अब विधानसभा के गलियारों तक सुनाई दे रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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