गुजरात में बड़ी कार्रवाई, ₹2153 करोड़ के ड्रग्स किए गए नष्ट, 278 पुलिसकर्मी पुरस्कृत गुजरात एक महीने पहले 52
गुजरात के भरूच में पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत ₹2153 करोड़ मूल्य के नशीले पदार्थ नष्ट किए हैं। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने नशा मुक्त राज्य बनाने के संकल्प के साथ बेहतरीन कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित भी किया।

भरूच में हुआ ड्रग्स के विनाश का बड़ा कार्यक्रम

गुजरात पुलिस ने राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी जंग को और तेज करते हुए भरूच के दाहेज में एक व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान एनवायरो इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के परिसर में कुल ₹2,153 करोड़ की कीमत वाले भारी मात्रा में ड्रग्स को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी मौजूद रहे। उन्होंने और ड्रग डिस्पोजल कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने जब्त किए गए मादक पदार्थों के स्टॉक का बारीकी से निरीक्षण किया। इन नशीले पदार्थों को पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाते हुए नष्ट किया गया। इसके अतिरिक्त, डिप्टी सीएम ने लकड़िया में नारकोटिक्स डिस्ट्रक्शन प्रोग्राम का वर्चुअली उद्घाटन भी किया।

इस पूरे ऑपरेशन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की 24 अलग-अलग पुलिस इकाइयों ने मिलकर 867 अलग-अलग मामलों में इन नशीले पदार्थों को जब्त किया था। नष्ट किए गए इस विशाल कंसाइनमेंट में कुल 13,249.127 किलोग्राम ड्रग्स के साथ-साथ 5,71,028 बोतलें नारकोटिक सब्सटेंस की शामिल थीं।

किन जिलों की पुलिस ने की कार्रवाई

इस मेगा ऑपरेशन में राज्य के विभिन्न हिस्सों की पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया। इसमें भरूच, नर्मदा, सूरत रूरल, सूरत सिटी, नवसारी, तापी-व्यारा, दाहोद, छोटा उदयपुर, पंचमहल, डांग-अहवा, वलसाड, वडोदरा रूरल, वडोदरा सिटी, आणंद, खेड़ा-नडियाद, वेस्टर्न रेलवे (वडोदरा और अहमदाबाद), अहमदाबाद रूरल, अहमदाबाद सिटी, गांधीनगर, मेहसाणा और साबरकांठा शामिल रहे। इनके साथ सीआईडी क्राइम और एटीएस की टीमें भी इस महत्वपूर्ण कार्रवाई का हिस्सा बनीं।

एनडीपीएस हैंडबुक का अनावरण

दाहेज स्थित जीएसीएल कंपनी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक नई एनडीपीएस हैंडबुक भी जारी की गई। गुजरात पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा तैयार की गई यह हैंडबुक जांच अधिकारियों को प्रैक्टिकल जानकारी मुहैया कराएगी और एनडीपीएस कानून के बेहतर कार्यान्वयन में मदद करेगी। कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति के संदेश के साथ 'ड्रग-फ्री गुजरात' विषय पर एक अवेयरनेस वीडियो दिखाया गया। इसके अलावा, नशा छोड़ने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित एक लघु फिल्म और राज्य सरकार की एंटी-ड्रग पहल को दर्शाने वाली एक विशेष प्रेजेंटेशन भी पेश की गई।

ड्रग्स सामाजिक बुराई और पुलिस की सफलता

उपमुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग की सराहना करते हुए ड्रग्स को आज के समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, गुजरात पुलिस ने समुद्री सीमाओं और भारत-पाकिस्तान बॉर्डर सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय अपराधी नेटवर्क को ध्वस्त करने में शानदार कामयाबी हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क पर की गई इस कार्रवाई को उन्होंने एक बड़ा झटका करार दिया। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल के दौरान चलाए गए निरंतर अभियानों के चलते ही हजारों करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए जा सके हैं।

सजा की दर बढ़ाने पर जोर

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि गुजरात में वर्तमान में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सजा मिलने की दर लगभग 65% है। उनका लक्ष्य इसे 100% तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कानूनी तंत्र को इतना मजबूत किया जा रहा है कि ड्रग माफियाओं के पास बचाव का कोई रास्ता न बचे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

278 पुलिसकर्मियों को मिला सम्मान

गुजरात पुलिस की मानवीय संवेदनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस केवल तस्करों को नहीं पकड़ती, बल्कि जांच के दौरान मिले डेटा से उन युवाओं की पहचान भी करती है जो लत के शिकार हैं। उन्हें और उनके परिवारों को परामर्श देकर सही रास्ते पर लाने का प्रयास किया जाता है। उपमुख्यमंत्री ने जनता से इस लड़ाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की। इस अवसर पर, राज्य सरकार की ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी के तहत कुल 278 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। ये सम्मान उन्हें ड्रग्स से जुड़े 21 बड़े और जटिल मामलों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया, जिसके तहत कुल ₹59.42 लाख की राशि इनाम के तौर पर प्रदान की गई।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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