पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में खूनी संघर्ष, प्रदर्शनकारियों पर सेना की फायरिंग में 8 लोगों की मौत का दावा विश्व एक महीने पहले 71
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनावी व्यवस्था और सरकारी दमन के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है, जिसमें अब तक 8 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।

PoK में सुरक्षा बलों का क्रूर दमन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। मुजफ्फराबाद और आसपास के इलाकों में विधानसभा चुनाव से पहले तनाव अपने चरम पर है। स्थानीय प्रशासन और मुनीर की सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के कारण हालात बिगड़ गए हैं। प्रदर्शनकारियों की आवाज को कुचलने के लिए सेना ने गोलियां बरसाईं, जिसमें 8 लोगों की जान जाने का दावा किया गया है। मुजफ्फराबाद में आज एक बड़े जनमार्च की योजना बनाई गई है, जिसे रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत लगा रही हैं।

रावलकोट और सुधनोती में भारी तनाव

रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट और सुधनोती के बीच के इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई है। इन दावों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की फायरिंग की चपेट में आने से 8 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना अभी संभव नहीं हो पाया है, लेकिन क्षेत्र से मिल रही तस्वीरें और स्थानीय लोगों के बयान वहां की भयावह स्थिति की पुष्टि कर रहे हैं।

मुजफ्फराबाद कूच को रोकने के लिए बल प्रयोग

बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने रावलकोट बस स्टैंड के पास उन्हें रोकने के लिए घेराबंदी कर दी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने न केवल आंसू गैस के गोले छोड़े, बल्कि सीधी फायरिंग भी की। इस पूरे आंदोलन की एक खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी भी बहुत बड़ी संख्या में देखी जा रही है, जो सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरी हैं।

चुनाव प्रणाली और 12 आरक्षित सीटों पर विवाद

PoK में चल रहे इस व्यापक आंदोलन की जड़ में वहां की विवादित चुनावी व्यवस्था है। क्षेत्र में विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं जो वास्तव में PoK के निवासी नहीं हैं, बल्कि लाहौर, कराची और रावलपिंडी जैसे शहरों में रहते हैं। स्थानीय जनता का आरोप है कि इस्लामाबाद की सरकार इन्हीं सीटों के माध्यम से PoK पर अपनी मनमर्जी की कठपुतली सरकार थोपती है। प्रदर्शनकारी इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की मांग कर रहे हैं।

36 दिनों से जारी संघर्ष और दमन

पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ PoK के निवासियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 36 दिनों से लोग सड़कों पर डटे हुए हैं और शहबाज-मुनीर प्रशासन को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले समूहों का दावा है कि इस 36 दिनों की अवधि में 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों कार्यकर्ता सलाखों के पीछे भेज दिए गए हैं। क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी पूरी तरह से ठप कर दी गई हैं। PoK में 27 जुलाई को चुनाव प्रस्तावित हैं।

गिरफ्तारियों का दौर और मानवाधिकार उल्लंघन

आंदोलन को कमजोर करने के लिए सैकड़ों राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। संचार के साधनों को बंद कर दिए जाने से इलाके में सूचना का अकाल है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं, जैसे बिजली और आटे की मांग करने पर भी उन्हें गोलियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बर्बरता पर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए PoK के लोगों पर हो रहे अत्याचारों को तुरंत बंद करने की अपील की है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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