राष्ट्रीय राजनीति
12 घंटे पहले
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खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर हालात बिगड़ते दिख रहे हैं और इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कुवैत के अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-जाबिर अल-सबा से टेलीफोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे वक्त हुई जब पश्चिम एशिया दोबारा अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और कुवैत खुद हाल ही में सीधे एक सुरक्षा संकट का शिकार बन चुका है।
हमले में गई एक भारतीय की जान
पिछले हफ्ते ही कुवैत के एक एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ था। इस हमले में मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी मंजूर अहमद की मौत हो गई। मंजूर करीब 30 साल से कुवैत में काम कर रहे थे और परिवार के एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए भारत लौटने की तैयारी में थे, लेकिन वापसी से पहले ही वे इस संघर्ष की चपेट में आ गए।
यही कारण है कि मंगलवार को जब पीएम मोदी ने कुवैत के अमीर से फोन पर बात की तो यह महज एक औपचारिक संवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई गंभीर चिंताएं छिपी थीं। प्रधानमंत्री ने जहां क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी फिक्र जाहिर की, वहीं भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमीर का आभार भी प्रकट किया।
बातचीत में क्या-क्या उठे मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत में पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते सुरक्षा हालात पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई और कुवैत की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पर हुए हमलों की कड़ी निंदा दोहराई। उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता को दोबारा कायम करने के लिए तनाव को कम करना, आपसी संवाद और कूटनीति ही सबसे उपयुक्त रास्ता है। पीएम ने कुवैत में बसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए अमीर द्वारा दिए जा रहे व्यक्तिगत ध्यान के प्रति भी कृतज्ञता जताई।
कुवैत में हर पांचवां व्यक्ति भारतीय
कुवैत की कुल आबादी करीब 50 लाख है, जिनमें लगभग 10 लाख भारतीय हैं। यानी वहां रहने वाले हर पांच लोगों में से एक भारतीय है। डॉक्टर से लेकर इंजीनियर, नर्स से लेकर टेक्नीशियन और मजदूर से लेकर कारोबारी तक, भारतीय कुवैत की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा हैं। ऐसे में वहां सुरक्षा संकट गहराने पर नई दिल्ली की चिंता का बढ़ना स्वाभाविक है।
फोन पर अमीर को भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए धन्यवाद देना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। इसके जरिए भारत यह जताना चाहता है कि वह विदेशों में रह रहे अपने नागरिकों की हिफाजत को लेकर लगातार सक्रिय रहता है।
सिर्फ नागरिकों तक सीमित नहीं मामला
यह कहानी केवल भारतीयों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। कुवैत भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण देश है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है और कच्चा तेल आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में कुवैत भी शामिल है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं या तेल उत्पादन पर असर पड़ता है तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह रही कि पीएम मोदी ने बातचीत में क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताते हुए साफ कहा कि तनाव घटाना, संवाद और कूटनीति का रास्ता ही असली समाधान है।
फोन कॉल का राजनीतिक संदेश
दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी कुवैत गए थे और 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश की यात्रा की थी। उस दौरे को भारत-कुवैत संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना गया था। अब जब पूरा क्षेत्र संकट से जूझ रहा है, तब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संवाद यह दर्शाता है कि यह रिश्ता केवल औपचारिक नहीं है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि बीते कुछ दिनों में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत लगातार यह कोशिश कर रहा है कि वह किसी एक पक्ष का हिस्सा बनने के बजाय स्थिरता और शांति की आवाज बनकर उभरे, क्योंकि खाड़ी में आग भड़कने का असर वहीं तक सीमित नहीं रहता। तेल बाजार से लेकर भारतीय कामगारों तक, इसकी गूंज हर जगह सुनाई देती है।
क्यों अहम है यह बातचीत
इसलिए मोदी और कुवैत के अमीर के बीच हुई बातचीत को महज एक फोन कॉल समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। एक ओर ड्रोन हमले में एक भारतीय की जान गई है, तो दूसरी ओर 10 लाख भारतीयों की सुरक्षा दांव पर लगी है। इसके ऊपर तेल, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे बड़े सवाल भी जुड़े हुए हैं। यानी भले ही यह फोन कॉल कुछ ही मिनटों की रही हो, लेकिन इसके पीछे लाखों भारतीयों और अरबों डॉलर के हितों की चिंता छिपी है। यही कारण है कि खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच हुई यह बातचीत दिल्ली के लिए भी उतनी ही अहम है, जितनी कुवैत के लिए।
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