ब्रिक्स में पीएम मोदी की कूटनीति से बैकफुट पर ट्रंप, चीन भी भारत से हाथ मिलाने को तैयार भारत 2 महीने पहले 98
वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत का कद तेजी से बढ़ा है। ब्रिक्स मंच का उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक संतुलन साधे रखा है, जिससे चीन जैसे देश भी अब भारत के साथ सहयोग की राह तलाश रहे हैं।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा

आज की वैश्विक राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अमेरिका और डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां अब कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति ने भारत को विश्व के केंद्र में ला खड़ा किया है। ब्रिक्स देशों के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा संदेश दिया है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारत अब केवल एक देश नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद रक्षा साझीदार के रूप में उभरा है।

चीन के साथ नए संबंधों की आहट

ब्रिक्स बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण रही है। इस बातचीत के बाद यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि चीन अब भारत के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को फिर से मजबूत करने का इच्छुक है। वांग यी ने बताया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने का संदेश दिया है। चीन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की भूमिका का समर्थन करेगा और आपसी संदेह को दूर करके सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान और इजरायल के बीच भारत का संतुलन

प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत यह है कि वे ईरान और इजरायल जैसे कट्टर प्रतिद्वंदियों के साथ एक साथ संवाद बनाए रखने में सफल रहे हैं। जहां एक ओर भारत इजरायल के साथ रक्षा सहयोग और संयुक्त उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते मजबूत किए जा रहे हैं। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का निमंत्रण दिया है। ईरान से तेल आयात में मिलने वाली छूट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है।

रक्षा निर्यात में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत का रक्षा क्षेत्र अब आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन 43746 करोड़ रुपये था, जो साल 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। रक्षा निर्यात का ग्राफ भी तेजी से ऊपर गया है, जो साल 2014 में महज 686 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 38424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर है। यूएई जैसे देश अब भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर सिस्टम खरीदने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

आतंकवाद और विदेशी फंडिंग पर सख्त प्रहार

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद और साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। इसके साथ ही, भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने उन गैर-सरकारी संगठनों पर भी नकेल कसी है जो विदेशी फंडिंग के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे थे। सरकार द्वारा कई एनजीओ के लाइसेंस रद्द कर अवैध फंडिंग के स्रोतों को ब्लॉक कर दिया गया है। पाकिस्तान के लिए भी स्थिति कठिन होती जा रही है, क्योंकि एफएटीएफ के बढ़ते दबाव के बीच उसे अपनी हरकतों के लिए जवाबदेह ठहराया जा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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