राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
6
विचारों
यूपी चुनाव 2027 का बिगुल और बदलती सियासत
उत्तर प्रदेश में साल 2027 का विधानसभा चुनाव अभी लगभग 6 महीने दूर है, लेकिन राज्य में चुनावी बिगुल अभी से बज चुका है। सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि इस बार की लड़ाई केवल सत्ता की नहीं है, बल्कि यह विचारधाराओं का सबसे बड़ा संघर्ष है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव हमेशा से ही सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं, लेकिन इस बार का परिदृश्य काफी अलग और आक्रामक नजर आ रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं जो मंदिर और सनातन संस्कृति को अपना मुख्य मुद्दा बनाए हुए हैं, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शिव मंदिर और सनातन के जरिए अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक और राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव
जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है, तब से विपक्षी इंडी गठबंधन के खेमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, विपक्ष राम मंदिर में चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर मोदी-योगी सरकार को घेरने की योजना बना रहा था। इस नैरेटिव को ध्वस्त करने के लिए पीएम मोदी ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए राम मंदिर के प्रबंधन की कमान सेना के एक ऐसे अधिकारी को सौंप दी है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी वीरता दिखाई थी। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO नियुक्त किया गया है। एयर मार्शल मिश्रा की छवि एक कुशल रणनीतिकार की है, जो कारगिल युद्ध में मिराज 2000 विमान से बमबारी करने वाली टीम का हिस्सा रहे थे। उनके आने से यह साफ हो गया है कि राम मंदिर के प्रबंधन में पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे विपक्ष का चढ़वा चोरी का मुद्दा स्वतः ही खत्म हो गया है।
योगी बनाम अखिलेश: मंदिर की राजनीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के बाद अब मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर अखिलेश यादव को सीधे चुनौती दे रहे हैं। योगी आदित्यनाथ हर मंच से सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं। वे लगातार शिव मंदिरों के दौरे कर रहे हैं और यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे भी सनातन धर्म के अनुयायी हैं। सैफई में एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवाकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। अखिलेश यादव का कहना है कि भगवान शिव राम और कृष्ण दोनों के आराध्य हैं, इसलिए उनके मंदिर का निर्माण आस्था का प्रतीक है। हालांकि, बीजेपी इसे अखिलेश की मजबूरी और चुनावी दिखावा करार दे रही है।
सहारनपुर में बुलडोजर एक्शन और विवाद
मंदिर की राजनीति के बीच अब मस्जिद का मुद्दा भी यूपी की सियासत में प्रवेश कर गया है। शनिवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन द्वारा ढहाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध था और कोर्ट ने भी इसे हटाए जाने का आदेश दिया था। इस कार्रवाई के विरोध में कैराना की सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इकरा हसन ने आरोप लगाया कि यह लोकतंत्र की हत्या है और सरकार बिना सोचे-समझे बुलडोजर का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, अखिलेश यादव ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सच्चा सनातनी किसी दूसरे धर्म की आस्था का अपमान नहीं करता है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की दुहाई देते हुए सरकार को सद्भाव बनाए रखने की नसीहत दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है, जबकि बीजेपी इसे केवल एक कानूनी प्रक्रिया बता रही है।
सीट शेयरिंग का गणित और इंडी गठबंधन की मुश्किलें
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है। साल 2017 के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिली करारी हार से सबक लेते हुए दोनों दल इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। गठबंधन के बावजूद सीट शेयरिंग को लेकर पेच फंसा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी 403 में से करीब 328 सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है और कांग्रेस को केवल 75 सीटें देने के मूड में है। वहीं, कांग्रेस 115 से 120 सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के बाद उनकी स्थिति मजबूत हुई है। इस खींचतान के बीच शिवपाल सिंह यादव का बयान सामने आया है कि 2027 का चुनाव सपा और कांग्रेस मिलकर ही लड़ेंगी, लेकिन सीटों का बंटवारा अभी भी एक बड़ी पहेली बना हुआ है।
भाभी बनाम भाभी: नया सियासी समीकरण
यूपी की राजनीति में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है जिसे 'भाभी बनाम भाभी' की जंग कहा जा रहा है। राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को सक्रिय राजनीति में उतार दिया है। सहारनपुर की रैली में चारू चौधरी का आक्रामक भाषण इस बात का प्रमाण है कि वे एनडीए की मजबूती के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने डिंपल यादव को महिला वोटरों को साधने की जिम्मेदारी दी है। अब तक पर्दे के पीछे रहने वाली ये दोनों महिला नेत्री अब सीधे चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं। इससे यूपी की चुनावी तस्वीर में एक नया रंग घुल गया है और कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मुकाबला आने वाले समय में और अधिक दिलचस्प होने वाला है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश का 2027 चुनाव धर्म, जाति, सीट शेयरिंग और बुलडोजर जैसी राजनीति के इर्द-गिर्द केंद्रित होता नजर आ रहा है।
Comments
0 comment