पितृपक्ष 2026: मोक्ष का पहला द्वार है यह स्थान, गयाजी जाने से पहले यहां क्यों करते हैं पिंडदान? धर्म 3 घंटे पहले 3
पितृपक्ष के दौरान गयाजी को पिंडदान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन एक विशेष स्थान ऐसा भी है जहां गया जाने से पहले तर्पण करना बेहद जरूरी है। जानिए भगवान श्री राम और माता सीता से जुड़ी इस जगह का धार्मिक महत्व और पितृपक्ष की प्रमुख तिथियां।

पितृपक्ष 2026 और पुनपुन नदी का महत्व

पितृपक्ष का समय अपने पूर्वजों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का पावन काल माना जाता है। इस दौरान देशभर में लोग श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। यूं तो बिहार का गयाजी तीर्थस्थल पिंडदान के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार गया पहुंचने से पहले एक अन्य स्थान पर रुककर तर्पण करना अनिवार्य माना गया है। यह पवित्र स्थान पुनपुन नदी का तट है, जिसे शास्त्रों में मोक्ष का प्रथम द्वार कहा जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त गया जाकर पिंडदान करना चाहते हैं, उन्हें पहले यहां की पवित्र नदी में स्नान कर अपना पहला तर्पण संपन्न करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर अनुष्ठान करने से न केवल पूर्वजों को मुक्ति मिलती है, बल्कि सात पीढ़ियों तक इसका पुण्य फल प्राप्त होता है।

पितृपक्ष 2026 की समय सीमा

इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा तिथि के श्राद्ध के साथ हो रही है। हालांकि, विधिपूर्वक पितृपक्ष की नियमित शुरुआत 27 सितंबर 2026 को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मानी जाएगी। यह पूरा पावन पखवाड़ा 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा। धार्मिक विश्वास है कि इन दिनों में पितर सूक्ष्म रूप में अपने परिजनों के घर आते हैं और उनके द्वारा अर्पित की गई श्रद्धा और तर्पण को स्वीकार करते हैं। विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म पितृ दोष से मुक्ति दिलाते हैं और परिवार में सुख, समृद्धि और तरक्की का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

भगवान श्री राम और माता सीता की पौराणिक कथा

पुनपुन नदी के तट का अत्यधिक महत्व होने के पीछे एक विशेष पौराणिक कथा है, जो भगवान श्री राम और माता जानकी से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान श्री राम अपने पिता राजा दशरथ के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए जा रहे थे, तब वे सीधे गया नहीं पहुंचे थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया में फल्गु नदी के तट पर मुख्य अनुष्ठान करने से पहले, उन्होंने पुनपुन नदी के किनारे रुककर अपने पितरों के लिए पहला तर्पण किया था। माता सीता के साथ मिलकर श्री राम ने यहीं पर सबसे पहले पिंड अर्पित किया था। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण पुनपुन को गया की यात्रा से पहले मोक्ष का प्रथम द्वार कहा जाता है और आज भी लाखों लोग इसी परंपरा का पालन करते हुए अपनी धार्मिक यात्रा यहीं से शुरू करते हैं।

गरुड़ पुराण में पुनपुन का उल्लेख

धार्मिक ग्रंथों में पुनपुन नदी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। गरुड़ पुराण में इस नदी को आदिगंगा के नाम से संबोधित किया गया है। मान्यता है कि इस पावन तट पर तर्पण करने से पितरों का उद्धार सुनिश्चित हो जाता है। यही कारण है कि पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और स्नान के उपरांत प्रथम पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करते हैं। इसके बाद ही वे आगे की यात्रा के लिए गया की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान से शेष अनुष्ठान पूरे किए जाते हैं।

पितृपक्ष 2026 की महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथियां

पितृपक्ष के दौरान हर तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 की प्रमुख श्राद्ध तिथियां नीचे दी गई हैं:

  • 26 सितंबर - शनिवार: पूर्णिमा श्राद्ध
  • 27 सितंबर - रविवार: प्रतिपदा श्राद्ध
  • 28 सितंबर - सोमवार: द्वितीया श्राद्ध
  • 29 सितंबर - मंगलवार: तृतीया श्राद्ध और महाभरणी
  • 30 सितंबर - बुधवार: चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
  • 1 अक्टूबर - गुरुवार: षष्ठी श्राद्ध
  • 2 अक्टूबर - शुक्रवार: सप्तमी श्राद्ध
  • 3 अक्टूबर - शनिवार: अष्टमी श्राद्ध
  • 4 अक्टूबर - रविवार: नवमी श्राद्ध
  • 5 अक्टूबर - सोमवार: दशमी श्राद्ध
  • 6 अक्टूबर - मंगलवार: एकादशी श्राद्ध
  • 7 अक्टूबर - बुधवार: द्वादशी और मघा श्राद्ध
  • 8 अक्टूबर - गुरुवार: त्रयोदशी श्राद्ध
  • 9 अक्टूबर - शुक्रवार: चतुर्दशी श्राद्ध
  • 10 अक्टूबर - शनिवार: सर्वपितृ अमावस्या

यह पितृपक्ष हमें अपने जड़ों से जुड़ने और उन पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर देता है, जिनकी वजह से आज हमारा अस्तित्व है। यदि आप भी इस वर्ष गयाजी जाने की योजना बना रहे हैं, तो पुनपुन नदी के तट पर अपनी धार्मिक यात्रा को विराम देकर अनुष्ठान करना न भूलें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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