उपनाम: गयाजी
पितृपक्ष की प्रमुख तिथियाँ: मातृ नवमी से लेकर घात चतुर्दशी तक का है विशेष आध्यात्मिक महत्व
पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान और तर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां जानिए मातृ नवमी, त्रयोदशी श्राद्ध और अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों के लिए घात चतुर्दशी का धार्मिक महत्व क्या है।
पितृपक्ष: गयाजी की 45 पिंड वेदियां और 3 तर्पण स्थलों का महत्व, जानिए 1 से 17 दिनों तक के श्राद्ध की विधि
गयाजी को पितरों को मोक्ष दिलाने वाला पवित्र स्थान माना जाता है, जहां श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार 1 से लेकर 17 दिनों तक का श्राद्ध कर्म करते हैं।
पितृ पक्ष विशेष: जानिए श्राद्ध की शुरुआत कैसे हुई और किसने किया था सबसे पहला पितृकर्म
सनातन धर्म में श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व है। गयाजी के विद्वान आचार्यों के अनुसार, इस पवित्र परंपरा की शुरुआत महर्षि निमि ने महर्षि अत्रि के मार्गदर्शन में की थी।
पितृपक्ष 2026: मोक्ष का पहला द्वार है यह स्थान, गयाजी जाने से पहले यहां क्यों करते हैं पिंडदान?
पितृपक्ष के दौरान गयाजी को पिंडदान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन एक विशेष स्थान ऐसा भी है जहां गया जाने से पहले तर्पण करना बेहद जरूरी है। जानिए भगवान श्री राम और माता सीता से जुड़ी इस जगह का धार्मिक महत्व और पितृपक्ष की प्रमुख तिथियां।
पितृपक्ष 2026: संतान नहीं होने पर कौन करेगा पिंडदान? गया के पुरोहित ने बताए नियम
पितृपक्ष के दौरान अगर किसी व्यक्ति की कोई संतान नहीं है, तो पिंडदान का अधिकार किसे मिलता है? गया के विशेषज्ञों ने इससे जुड़े धार्मिक नियमों और आत्म-पिंडदान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है।
गयाजी में महंगाई को मात: ₹10 में मिल रहे हैं 3 गरमागरम समोसे, स्वाद ऐसा कि ग्राहकों को करना पड़ता है 30 मिनट का इंतजार
गया शहर के मंगला गौरी मंदिर के निकट स्थित एक दुकान पर मात्र ₹10 में 3 मिनी समोसे बेचे जा रहे हैं, जिसे खरीदने के लिए लोग रोजाना लंबी कतारें लगाते हैं।