उत्तराखंड के निर्माता माने जाने वाले यूकेडी का क्या है भविष्य, 2027 के चुनाव में कैसी होगी वापसी? उत्तराखंड 3 महीने पहले 125
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष करने वाली उत्तराखंड क्रांति दल पार्टी अब अपना खोया हुआ आधार तलाश रही है, क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कोई बड़ा चमत्कार कर पाएगी?

क्षेत्रीय पहचान और संघर्ष का इतिहास

उत्तराखंड राज्य के निर्माण का श्रेय जिस मुख्य क्षेत्रीय राजनीतिक दल को जाता है, वह उत्तराखंड क्रांति दल यानी यूकेडी है। दशकों तक चले राज्य आंदोलन की कमान इसी दल के हाथों में थी। उस दौर में जनता के बीच इस पार्टी की पैठ इतनी गहरी थी कि संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय भी पार्टी के उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। उस दौरान रानीखेत और डीडीहाट जैसे क्षेत्रों से यूकेडी के विधायक चुनकर उत्तर प्रदेश विधानसभा तक पहुंचे थे, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।

चुनाव दर चुनाव गिरता ग्राफ

जब पहली बार उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ और पहले विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए, तब यूकेडी का प्रदर्शन उल्लेखनीय था। उस समय राज्य की पहली विधानसभा में यूकेडी के कुल 4 विधायक चुनकर आए थे। हालांकि, समय बीतने के साथ पार्टी का राजनीतिक आधार लगातार कमजोर होता गया। आज स्थिति यह है कि विधानसभा में पार्टी के विधायकों की संख्या शून्य हो चुकी है। राज्य के राजनीतिक परिदृश्य से पार्टी का धीरे-धीरे सिमट जाना एक बड़े अस्तित्व के संकट की ओर इशारा करता है।

2027 के चुनाव और नई उम्मीदें

मौजूदा समय में उत्तराखंड क्रांति दल के भीतर आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर काफी हलचल देखी जा रही है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता फिर से अपने पुराने गौरव को वापस लाने की कोशिश में जुटे हैं। देखना यह होगा कि क्या उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने वाली यह पार्टी आने वाले चुनावों में अपनी खोई हुई साख को वापस पा सकेगी या फिर यह संघर्ष मात्र एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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