बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
नीलम देवी की बढ़ गईं मुश्किलें
बिहार की राजनीति में जेडीयू से निष्कासित विधायक अनंत सिंह की पत्नी और विधायक नीलम देवी पर पार्टी ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। पार्टी की सिफारिश के बाद नीलम देवी को 20 सूत्री समिति के सदस्य पद से मुक्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के साथ ही उनसे मिला राज्य मंत्री का दर्जा भी अब छिन गया है। जेडीयू से बाहर किए जाने के बाद नीलम देवी के लिए यह दूसरी सबसे बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती है, जिसने राज्य की सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
अनंत सिंह की सदस्यता पर तलवार
यह पूरी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब उनके पति अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जाकर खुलकर बगावत की थी। उन्होंने नीरज कुमार को हराने के उद्देश्य से जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार किया और उन्हें जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी।
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में केवल निष्कासन ही नहीं, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता को 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत रद्द करने की भी अनुशंसा की गई है। पार्टी की ओर से अनंत सिंह के साथ साथ उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ भी एक के बाद एक ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है।
कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत शर्मा का बयान राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे रहा है। अजीत शर्मा ने कहा है कि यदि अनंत सिंह कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं, तो उनकी पार्टी उनका स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सभी दलों और व्यक्तियों के लिए अपने दरवाजे खुला रखती है। हालांकि, अजीत शर्मा ने यह भी साफ कर दिया कि अनंत सिंह के पार्टी में शामिल होने या न होने पर कोई भी अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही लेगा, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की भूमिका मुख्य होगी।
निष्कासन के पीछे के प्रमुख कारण
जेडीयू नेतृत्व ने अनंत सिंह को बाहर निकालने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण गिनाए हैं:
- पार्टी विरोधी गतिविधियां: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में अनंत सिंह ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का सरेआम विरोध किया। वे पार्टी लाइन से हटकर विरोधी उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करते देखे गए।
- नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी: पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा उन्हें बागी रुख न अपनाने की सख्त हिदायत दी गई थी और सुलह की कोशिशें भी की गई थीं, लेकिन अनंत सिंह ने इन सभी निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया और अपने बगावती तेवर जारी रखे।
- व्यक्तिगत बयानबाजी: अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार पर सार्वजनिक रूप से तीखे व्यक्तिगत हमले किए और पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए, जो अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।
पार्टी की ओर से की गई यह अनुशासनात्मक कार्रवाई अब बिहार की आगामी राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
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