सावन के महीने में घर पर कैसे करें रुद्राभिषेक, जानें विद्वान पंडित से सरल और प्रभावी विधि धर्म एक घंटा पहले 4
सावन का पवित्र माह भगवान शिव की भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यदि आप मंदिर जाने में असमर्थ हैं, तो करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा द्वारा बताई गई इस सरल विधि से घर पर भी रुद्राभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

सावन में घर पर शिव आराधना का महत्व

सावन का पावन महीना देवाधिदेव महादेव की पूजा और साधना के लिए पूरे वर्ष में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त पूरे उत्साह के साथ मंदिरों में जाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। हालांकि, जीवन की व्यस्तताओं या अन्य किसी कारणवश यदि आप मंदिर जाने में सक्षम नहीं हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आध्यात्मिक गुरुओं के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए स्थान से अधिक भक्त की भावना और श्रद्धा का महत्व होता है। करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा का कहना है कि आप अपने घर पर ही पूरी निष्ठा और सादगी के साथ रुद्राभिषेक का अनुष्ठान कर सकते हैं।

रुद्राभिषेक के लिए आवश्यक तैयारी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का अभिषेक अत्यंत फलदायी होता है। पंडित हरिमोहन शर्मा के मुताबिक, हालांकि वैदिक विधि से रुद्री पाठ और मंत्रोच्चार के साथ विद्वान ब्राह्मणों द्वारा करवाया गया रुद्राभिषेक सर्वोत्तम होता है, लेकिन सामान्य जन भी अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार घर पर इसकी सरल पूजा कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आवश्यक है कि आप स्नान कर स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखें और वहां भगवान शिव के शिवलिंग को स्थापित करें। शिवलिंग को एक थाली या पवित्र पूजा चौकी पर रखा जाना चाहिए। पूजा शुरू करने से पहले दीपक प्रज्वलित करें और सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान गणेश का स्मरण करें, क्योंकि कोई भी मांगलिक कार्य उनकी स्तुति के बिना अधूरा माना जाता है।

पूजा सामग्री का चयन

रुद्राभिषेक के लिए बहुत अधिक तामझाम की आवश्यकता नहीं होती। आप सरलता से उपलब्ध होने वाली सामग्री से ही अभिषेक कर सकते हैं। पूजा के लिए आपको शिवलिंग, शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी या मिश्री, बेलपत्र, सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीपक, कपूर और फल-मिठाई की आवश्यकता होगी। यदि संभव हो तो आप इन सामग्रियों का उपयोग करके पंचामृत तैयार कर सकते हैं, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

संकल्प और अभिषेक की विधि

पूजा की शुरुआत संकल्प के साथ करें। अपने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना मन में दोहराएं। इसके बाद उस जल को पृथ्वी पर छोड़ दें। अब अभिषेक की प्रक्रिया शुरू करें और पूरी पूजा के दौरान मन ही मन ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल की एक पतली धारा अर्पित करें। इसके बाद दूध से अभिषेक करें और पुनः जल चढ़ाएं। इसी क्रम में दही, घी और शहद से अभिषेक करें और हर बार जल अर्पित करना न भूलें। अंत में आप चीनी या मिश्री के घोल अथवा पंचामृत का उपयोग कर सकते हैं। अंत में शुद्ध गंगाजल से शिवलिंग को अंतिम स्नान कराएं।

पूजा का समापन और आरती

अभिषेक पूर्ण होने के बाद शिवलिंग को एक साफ और मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से पोंछें। अब शिवलिंग पर चंदन लगाएं और उन्हें बेलपत्र, फूल तथा अक्षत अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र विशेष रूप से प्रिय है, इसलिए इसे श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं। इसके बाद धूप और दीपक जलाकर उनकी आराधना करें। पूजा के समापन पर भगवान को फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं। इसके बाद कपूर या दीपक से उनकी आरती उतारें। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा या शिव स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में हाथ जोड़कर महादेव से अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने की प्रार्थना करें। अंत में शिव का प्रसाद स्वयं ग्रहण करें और उसे अपने परिवार के अन्य सदस्यों में भी बांटें। पंडित जी का स्पष्ट मानना है कि पूजा में दिखावे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भगवान के प्रति आपकी शुद्ध भावना और भक्ति है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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