दिल्ली की एक मुलाकात ने बदल दी बिहार की शिक्षा तस्वीर, सम्राट चौधरी ने खोला राज बिहार एक दिन पहले 8
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि कैसे एक सांसद के साथ हुई चर्चा ने उन्हें राज्य में एक साथ 211 डिग्री कॉलेज खोलने के लिए प्रेरित किया।

दिल्ली की वह मुलाकात और बदलाव की शुरुआत

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उस घटना का जिक्र किया, जिसने राज्य की शिक्षा नीति को एक नई दिशा दी। सम्राट चौधरी ने बताया कि जब वह दिल्ली से यात्रा करके लौट रहे थे, उसी दौरान उनकी मुलाकात सांसद अशोक मित्तल से हुई। इस बातचीत के दौरान अशोक मित्तल ने उन्हें जानकारी दी कि जालंधर में स्थित उनकी यूनिवर्सिटी में बिहार के लगभग 11,000 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

बिहार की पूंजी और छात्रों का पलायन

इस मुलाकात को याद करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें यह एहसास हुआ कि बिहार की एक बहुत बड़ी धनराशि शिक्षा के नाम पर दूसरे राज्यों में जा रही है। छात्रों का बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना राज्य के विकास के लिए एक चिंता का विषय था। इसी सोच के साथ, उन्होंने सत्ता में आने के बाद शिक्षा के विस्तार का खाका तैयार किया और एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया।

शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य

न्यूज़18 इंडिया के डायमंड स्टेट्स समिट में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार द्वारा स्थापित शिक्षा व्यवस्था की नींव को और अधिक प्रभावी बनाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने माना कि जनता के साथ बातचीत के दौरान अक्सर शिक्षकों की कमी और लाइव क्लासेज के अभाव की शिकायतें सामने आती थीं। उनकी सरकार अब इन कमियों को दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।

आवेदन और सरकारी प्रक्रिया

सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि डिग्री कॉलेज खोलने के लिए जितने भी आवेदन उनके पास आए थे, सरकार ने उन सभी आवेदनों को मंजूरी दे दी है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में एक साथ 211 नए कॉलेज स्थापित किए गए हैं। हाल ही में बिहार विधानसभा में प्राइवेट यूनिवर्सिटी संशोधन विधेयक 2026 भी पारित किया गया है।

उद्देश्य और विपक्ष का नजरिया

सरकार का मानना है कि इस संशोधन से राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है जो मजबूरन दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य की विपक्षी पार्टियों ने इस कदम को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। उनका तर्क है कि निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में वृद्धि से उच्च शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा के अवसर से वंचित रह सकते हैं। सरकार के इस कदम को भविष्य के बिहार के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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