बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने केंद्र में प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली, तब आम लोगों के मन में बिहार को लेकर एक बड़ा सवाल मौजूद था। सवाल यह था कि क्या राज्य के विकास की गति में बदलाव आएगा और क्या लंबे अरसे से पिछड़ा माने जाने वाले इस प्रदेश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और निवेश का कोई नया अध्याय शुरू हो पाएगा।
उम्मीदों को आगे बढ़ाने की कोशिश
इन्हीं अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अलग-अलग स्तरों पर नीतिगत और विकास से जुड़ी कई पहल कीं। मकसद यह था कि राज्य की विकास रफ्तार को तेज किया जा सके और बुनियादी सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जा सके।
12 वर्षों में दिखे बड़े बदलाव
बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार के मुताबिक, बीते 12 वर्षों के दौरान सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे अहम क्षेत्रों में उल्लेखनीय बदलाव सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में हुए कामों का असर साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है।
नई दिशा और पहचान
प्रवक्ता का कहना है कि इन तमाम बदलावों ने मिलकर बिहार की विकास यात्रा को एक नई दिशा देने के साथ-साथ राज्य को एक अलग पहचान दिलाने का काम भी किया है।
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