5 साल की उम्र में क्रिकेट का जुनून, रोज खेलती हैं 500 गेंदें, पटना की नन्ही आन्या के लिए पिता ने छत पर ही बनाया स्टेडियम बिहार 2 महीने पहले 80
पटना की 5 वर्षीय आन्या अपनी उम्र के बच्चों से बिल्कुल अलग हैं, जो रोजाना 500 गेंदों का अभ्यास कर एक प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने की राह पर चल रही हैं। उनके पिता ने उनकी इस प्रतिभा को निखारने के लिए घर की छत पर ही आधुनिक सुविधाओं से लैस एक मिनी स्टेडियम तैयार कर दिया है।

क्रिकेट के मैदान पर आन्या का बड़ा हौसला

पटना की रहने वाली महज 5 साल की आन्या सिंह की उम्र भले ही कम हो, लेकिन उनके हौसले आसमान छू रहे हैं। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा की मस्ती में डूबे रहते हैं, आन्या उस उम्र में एक पेशेवर क्रिकेटर की तरह कड़ी मेहनत कर रही हैं। उनका क्रिकेट के प्रति समर्पण इतना गहरा है कि वे हर दिन लगभग 500 गेंदें खेलती हैं। उनकी इस मेहनत को संबल देने के लिए उनके पिता चंदन सिंह ने कोई कसर नहीं छोड़ी है और घर की छत को ही एक शानदार मिनी क्रिकेट स्टेडियम में तब्दील कर दिया है।

दिनचर्या जो किसी प्रोफेशनल खिलाड़ी से कम नहीं

आन्या अनीसाबाद की निवासी हैं और पहली कक्षा की छात्रा हैं। उनकी दिनचर्या किसी आम स्कूल जाने वाले बच्चे से बिल्कुल अलग है। सुबह की पहली किरण के साथ ही आन्या की फिटनेस ट्रेनिंग शुरू हो जाती है। स्कूल जाने से पहले वे अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अभ्यास करती हैं। स्कूल से लौटने के बाद वे थोड़ा विश्राम करती हैं, लेकिन इसके तुरंत बाद उनका बल्ला फिर से उनके हाथों में होता है। शाम 3 बजे से 4 बजे तक उनके पिता चंदन सिंह खुद गेंदबाजी करते हैं और आन्या बल्लेबाजी का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह पास की ही एक क्रिकेट एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए जाती हैं। शाम को 6 बजकर 30 मिनट पर घर वापसी के बाद भी उनका अभ्यास रुकता नहीं है। रात 7 बजे से 9 बजे तक एक ट्रेनर की देखरेख में आन्या का छत पर सघन अभ्यास सत्र चलता है। कुल मिलाकर, आन्या हर दिन 6 से 7 घंटे क्रिकेट को समर्पित करती हैं।

दादी का सपना बना पिता का संकल्प

आन्या के पिता चंदन सिंह ने बताया कि उन्हें स्वयं क्रिकेट का गहरा शौक रहा है और वे साल 1997 से क्रिकेट को बारीकी से फॉलो कर रहे हैं। जब आन्या की मां गर्भवती थीं, तब आन्या की दादी ने यह इच्छा जाहिर की थी कि घर में बेटी का जन्म हो तो उसे क्रिकेटर बनाया जाए। चंदन सिंह ने इस बात को गांठ बांध लिया। आन्या के जन्म के बाद से ही उन्होंने उसे क्रिकेट के माहौल में ढालना शुरू कर दिया। महज साढ़े तीन साल की उम्र से आन्या ने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। आज आन्या ग्लव्स, हेलमेट और पैड पहनकर ड्यूज, टेनिस और सिंथेटिक, तीनों तरह की गेंदों का बखूबी सामना कर लेती हैं।

छत पर आधुनिक क्रिकेट ट्रेनिंग सेंटर

पिता चंदन सिंह ने आन्या की ट्रेनिंग में कोई बाधा न आए, इसके लिए अपने तीन मंजिला मकान की छत पर विशेष इंतजाम किए हैं। उन्होंने वहां एक पक्की सीमेंट की पिच बनवाई है। सुरक्षा के लिहाज से चारों तरफ नेट लगाए गए हैं ताकि गेंद नीचे न गिरे। वहां बेहतर रोशनी की व्यवस्था की गई है, साथ ही गर्मियों के मौसम में अभ्यास को आसान बनाने के लिए स्प्रिंकलर और स्टैंड फैन लगाए गए हैं। धूप से सुरक्षा के लिए छत पर सोलर पैनल भी लगवाए गए हैं। यह पूरा सेटअप किसी छोटे क्रिकेट एकेडमी की तरह दिखता है। पिता का लक्ष्य है कि जब तक आन्या 10 साल की नहीं हो जातीं, वे घर पर ही बेरोकटोक और पूरी सुविधाओं के साथ अभ्यास कर सकें।

पिता निभा रहे हैं सपोर्ट स्टाफ की भूमिका

चंदन सिंह एक छोटी सी दुकान चलाकर अपना परिवार पालते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता हमेशा आन्या का क्रिकेट करियर ही रहता है। अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वे आन्या की किट, ट्रेनिंग और अन्य जरूरतों पर खर्च करते हैं। उन्होंने स्कूल से भी स्पष्ट आग्रह किया है कि बेटी पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव न डाला जाए, क्योंकि अभी उसका पूरा ध्यान खेल पर है। चंदन सिंह का कहना है कि वे सिर्फ पिता नहीं, बल्कि उसके पहले कोच और सपोर्ट स्टाफ भी हैं। वे आन्या की डाइट, तेल मालिश और समय पर उसे तैयार करने का पूरा ध्यान खुद रखते हैं।

स्मृति मंधाना हैं प्रेरणा

आन्या की आदर्श भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी स्मृति मंधाना हैं। वह उन्हें खेलते हुए देखकर काफी प्रेरित होती हैं और उन्हीं की तरह बल्लेबाजी करने का प्रयास करती हैं। आन्या को पुल शॉट खेलना सबसे ज्यादा पसंद है। आन्या का सपना है कि वह एक दिन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेले और देश का गौरव बढ़ाए। उनके पिता का अटूट विश्वास और आन्या की कड़ी मेहनत को देखकर यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में यह नन्ही खिलाड़ी निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा नाम बनेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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