बिहार
एक घंटा पहले
2
विचारों
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी से गरमाई सियासत
बिहार विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। चुनावी हलफनामे में उनके द्वारा घोषित की गई भारी-भरकम संपत्ति को लेकर अब बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
हलफनामे में 198 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा
चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी के पास कुल मिलाकर लगभग 198 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। बिहार जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े और गरीब राज्य में इतनी बड़ी संपत्ति का होना विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। विरोधी दल अब इस अकूत दौलत को लेकर जन सुराज के संस्थापक पर लगातार हमले कर रहे हैं। सवाल यह उठाया जा रहा है कि बिहार की गरीब जनता के कल्याण की बात करने वाले नेता के पास खुद इतनी बड़ी पूंजी कहां से आई और वह इस संपत्ति के साथ गरीबों का प्रतिनिधित्व कैसे करेंगे।
टिकट बेचने के आरोपों से और घिरे जन सुराज प्रमुख
प्रशांत किशोर पर केवल उनकी भारी-भरकम संपत्ति को लेकर ही सवाल नहीं उठ रहे हैं, बल्कि उन पर राजनीतिक तौर पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने साल 2025 के आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जमीन पर एक झूठा माहौल तैयार किया और इसके दम पर उम्मीदवारों को टिकट बेचे। इन आरोपों के बीच इतनी बड़ी संपत्ति का सामने आना उनके राजनीतिक अभियान के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
बिहार के गरीब वोटरों के बीच भरोसे की चुनौती
विपक्षी पार्टियां अब इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश में हैं। उनके सामने मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
- बिहार जैसे राज्य में जहां की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है, वहां 198 करोड़ रुपये की संपत्ति रखने वाले नेता पर जनता कैसे विश्वास करेगी?
- टिकट बंटवारे में कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के आरोपों पर प्रशांत किशोर जनता को क्या सफाई देंगे?
- आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह के विवादों का जन सुराज के चुनावी अभियान पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल, बांकीपुर की जनता और बिहार के मतदाता इस पूरे घटनाक्रम को करीब से देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर इन राजनीतिक हमलों और आरोपों का किस प्रकार सामना करते हैं।
Comments
0 comment