दिल्ली में अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई: पीतमपुरा-शालीमार बाग रोड को चौड़ा करने के लिए हटाया गया अवैध धार्मिक स्थल दिल्ली एक महीने पहले 79
दिल्ली सरकार ने यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पीतमपुरा और शालीमार बाग को जोड़ने वाली मुख्य सड़क से एक अवैध धार्मिक ढांचे को हटा दिया है। राजधानी में अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।

राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख लगातार जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को दिल्ली सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पीतमपुरा और शालीमार बाग को आपस में जोड़ने वाली मुख्य सड़क के बीच से एक अवैध धार्मिक स्थल को हटा दिया। यह धार्मिक ढांचा सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बना हुआ था, जिसके कारण स्थानीय लोगों को लंबे समय से भारी ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस व्यस्त सड़क को चौड़ा करने के उद्देश्य से ही यह कदम उठाया गया है ताकि राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीनों पर किए गए किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को लेकर उसकी नीति पूरी तरह से जीरो-टॉलरेंस की है।

सड़क चौड़ीकरण और जाम से मुक्ति की कवायद

पीतमपुरा-शालीमार बाग मार्ग पर रोजाना हजारों गाड़ियों का आना-जाना होता है। सड़क के बीच में अवैध कब्जा होने के कारण यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती थीं। स्थानीय निवासियों और राहगीरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस बाधा को हटाने का निर्णय लिया। दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाना और लोगों के सफर को सुगम बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी के तहत इस अवैध निर्माण को पूरी सुरक्षा और मुस्तैदी के साथ ढहा दिया गया है।

अवैध निर्माणों पर लगातार चल रहा है पीला पंजा

दिल्ली सरकार और विभिन्न सरकारी एजेंसियां इस समय पूरे शहर में अवैध और असुरक्षित निर्माणों के खिलाफ एक विशेष और सघन अभियान चला रही हैं। इस अभियान के तहत नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई इमारतों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। इस अभियान के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 1 जून से शुरू हुए इस महाभियान के तहत अब तक बिल्डिंग नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली कुल 94 अवैध इमारतों को जमींदोज किया जा चुका है।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाली लगभग 114 इमारतों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
  • बीती 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में घटित हुए एक बेहद दर्दनाक हादसे के बाद इस अभियान की रफ्तार को और भी तेज कर दिया गया है।
  • मालवीय नगर की घटना के बाद से अब तक कुल 63 अवैध इमारतों को ढहाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
  • इस अभियान के दौरान 3 जून को महज एक ही दिन में सबसे अधिक कार्रवाई करते हुए 22 अवैध ढांचों को नेस्तनाबूद किया गया था।
  • इसके बाद 7 जून को एक बड़ा एक्शन लेते हुए विभिन्न इलाकों में कुल 77 संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई पूरी की गई।

इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी बेहद अहम रही है। विभाग की टीमों ने दिल्ली के सभी 13 जिलों में कुल मिलाकर 124 संवेदनशील और चिन्हित स्थानों का सघन दौरा किया। नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई की गई। इस पूरे संयुक्त अभियान में दिल्ली नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित सरकारी विभाग व एजेंसियां मिलकर और आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

सुरक्षा पुख्ता करने के लिए उठाए जा रहे हैं बड़े कदम

राजधानी में अवैध कब्जों और असुरक्षित इमारतों पर बोलते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार अवैध निर्माणों, भूमि पर जबरन कब्जों और विशेष रूप से फायर सेफ्टी मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कतई नरम रुख नहीं अपनाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी अनधिकृत गतिविधियों को भविष्य में पूरी तरह से रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और पारदर्शी सिस्टम तैयार करने पर काम किया जा रहा है।

इसके अलावा, दिल्ली सरकार अब एक नए और महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव पर भी विचार कर रही है। सरकार बहुमंजिला इमारतों और सार्वजनिक स्थलों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस यानी तृतीय-पक्ष बीमा को अनिवार्य बनाने की योजना बना रही है। इस नई नीति के तहत केवल उन्हीं इमारतों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी जो सरकार द्वारा तय किए गए सुरक्षा और ढांचागत मजबूती के सभी कड़े पैमानों पर पूरी तरह से खरी उतरेंगी। इस कदम से न केवल अवैध निर्माणों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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