इजरायल में आम चुनाव की तारीख घोषित, गाजा युद्ध के बीच बेंजामिन नेतन्याहू के भविष्य का होगा फैसला विश्व एक घंटा पहले 2
इजरायल की संसद ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में आम चुनाव तय समय पर 27 अक्टूबर 2026 को ही होंगे, जिससे समय से पहले मतदान की अटकलों पर विराम लग गया है। यह चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए अपनी गिरती साख और युद्ध के बाद के नेतृत्व को साबित करने की बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

इजरायल में समय पर होंगे आम चुनाव

इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि देश में अगले आम चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित किए जाएंगे। यह वह अंतिम तिथि है जो कानून के तहत निर्धारित की गई है। संसद की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान सरकार अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा करने जा रही है। ऐसी स्थिति में संसद को समय से पहले भंग करने के लिए किसी नए कानून या विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। इस घोषणा के साथ ही इजरायल के राजनीतिक गलियारों में चल रही समय से पहले चुनाव होने की तमाम चर्चाओं पर पूर्ण विराम लग गया है।

50 वर्षों के बाद सरकार पूरा करेगी अपना कार्यकाल

यह चुनावी घोषणा इजरायल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। पिछले करीब 40 वर्षों के अंतराल में ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव किसी आंतरिक विवाद या राजनीतिक संकट के कारण समय से पहले नहीं, बल्कि अपने तय कार्यक्रम के अनुसार हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पिछले 50 से अधिक वर्षों के दौरान अपना 4 साल का पूरा कार्यकाल सफलतापूर्वक संपन्न करने वाली पहली सरकार बनने जा रही है। गौरतलब है कि इस वर्ष मई के महीने में संसद को भंग करने के लिए एक मतदान हुआ था, जिसके बाद से ही इजरायल में समय से पहले चुनाव होने का अंदेशा बना हुआ था, जो अब समाप्त हो गया है।

नेतन्याहू की साख के लिए लिटमस टेस्ट

अक्टूबर 2023 में हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान एवं ईरान के साथ शुरू हुए युद्धों के मद्देनजर, आगामी चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व की परख के तौर पर देखा जा रहा है। व्यापक रूप से इसे एक 'जनमत संग्रह' के समान माना जा रहा है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह इजरायल में होने वाला पहला आम चुनाव होगा। 76 वर्षीय नेतन्याहू के लिए आगामी चुनावी सफर अत्यंत कठिन प्रतीत होता है। प्री-पोल सर्वे के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे इशारा करते हैं कि नेतन्याहू के दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को बड़ा झटका लग सकता है और उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद उनकी 'सुरक्षा प्रदाता' वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे उनकी लोकप्रियता का ग्राफ लगातार गिर रहा है। साथ ही, वर्ष 2019 से चले आ रहे भ्रष्टाचार के गंभीर मामले भी उनके लिए बड़ी मुसीबत बने हुए हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है।

विपक्ष की कमजोरी से मिली नेतन्याहू को राहत

देश की जनता के बढ़ते आक्रोश और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी राहत विपक्षी दलों की बिखरी हुई स्थिति है। वर्तमान में विपक्षी खेमे के पास नेतन्याहू का मुकाबला करने के लिए न तो कोई संयुक्त रणनीति मौजूद है और न ही कोई सर्वसम्मत चेहरा। विपक्ष की इसी स्पष्ट नेतृत्व की कमी और आपसी गुटबाजी को इस समय नेतन्याहू के गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है, जो उन्हें सत्ता में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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