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3 सप्ताह पहले
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सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूतियों का घातक हमला
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब पश्चिम एशिया के अन्य देशों में भी अपनी जड़ें फैला रहा है। ताजा घटनाक्रम में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया है। हूती संगठन के नेताओं का दावा है कि यह हमला सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में हुए हवाई हमलों के प्रतिशोध में किया गया है, जिसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर सऊदी अरब को दोषी ठहराया है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गहरी चिंता व्यक्त की है और क्षेत्र के सभी देशों से संयम बरतते हुए बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने का आग्रह किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री जंग का खतरा
तनाव के इस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। उन्होंने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में ईरान के विरुद्ध नाकेबंदी को फिर से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इस सुरक्षित समुद्री मार्ग से गुजरने वाले अन्य देशों के जहाजों से शुल्क वसूलने की घोषणा की गई है। ईरान ने अमेरिकी फैसले को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और उसका संचालन करना ईरान का संप्रभु अधिकार है। हालिया दिनों में समुद्री सीमा पर जहाजों को निशाना बनाने और जवाबी सैन्य कार्रवाई की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है।
सैन्य नुकसान और भविष्य पर मंडराता खतरा
इस संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना ने अपने अब तक के नुकसान के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जारी सैन्य टकराव में 14 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, वहीं 400 से अधिक जवान घायल हुए हैं। क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सैन्य टकराव का जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं खोजा गया, तो इसके परिणाम वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। मध्य-पूर्व की इन हलचलों पर नजर बनी हुई है।
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