बिहार को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी सौगात, एनटीपीसी बाढ़ में 400 MWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम का शिलान्यास बिहार 3 महीने पहले 126
बिहार के पटना जिले में स्थित एनटीपीसी बाढ़ में अब बिजली ग्रिड को मजबूती देने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल होगा। यहाँ 400 MWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की आधारशिला रखी गई है।

बिहार की ऊर्जा क्षमता में इजाफा

बिहार के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा टिकाऊ बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। पटना जिले में स्थित एनटीपीसी बाढ़ पावर स्टेशन में अब 400 MWh क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, जिसे तकनीकी भाषा में BESS भी कहा जाता है, की आधारशिला रखी गई है। इस नई परियोजना के अस्तित्व में आने से न केवल बिहार के बिजली ग्रिड की कार्यक्षमता में इजाफा होगा, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता भी काफी हद तक बढ़ जाएगी।

क्या है यह BESS तकनीक

आसान शब्दों में समझें तो बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली यानी BESS एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित स्टोर करके रखती है। जब भी बिजली की मांग बढ़ती है या ग्रिड को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, यह सिस्टम तुरंत बिजली उपलब्ध कराने का काम करता है। इस परियोजना के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • यह सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को ग्रिड के साथ अधिक कुशलता से जोड़ने में मदद करेगी।
  • बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में यह सिस्टम एक अहम भूमिका निभाएगा।
  • जरूरत के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना अब पहले से अधिक आसान हो जाएगा।

परियोजना का उद्घाटन और मुख्य अतिथि

इस महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास कार्यक्रम एनटीपीसी बाढ़ के परिसर में आयोजित किया गया। एनटीपीसी लिमिटेड के निदेशक (परिचालन) रवीन्द्र कुमार ने इस प्रणाली की नींव रखी। इस कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा क्षेत्र के कई दिग्गज अधिकारी मौजूद थे। इनमें क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्व-1) एल. के. बेहेरा, एनटीपीसी बाढ़ के कार्यकारी निदेशक सी. सत्य रामा कृष्ण और एनजीएसएल के प्रबंध निदेशक महेश गोविंद केंडे प्रमुख थे। इन सभी के सामने परियोजना के लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

ग्रिड की मजबूती और भविष्य की तैयारी

एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस तरह के बैटरी स्टोरेज सिस्टम की आवश्यकता और अधिक महसूस की जाएगी। यह सिस्टम न केवल परिचालन क्षमता को बेहतर करेगा बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। पीक डिमांड यानी जब बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है, तब यह स्टोर की गई बिजली ग्रिड को टूटने से बचाएगी और सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने देगी।

समीक्षा बैठक और हरित विकास का संकल्प

शिलान्यास समारोह के बाद एनटीपीसी के निदेशक (परिचालन) ने एनटीपीसी बाढ़ के स्टेज-I नियंत्रण कक्ष का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां चल रही परिचालन गतिविधियों का जायजा लिया और अधिकारियों से फीडबैक भी लिया। इसके पश्चात प्रशासनिक भवन में एक विस्तृत समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें BESS परियोजना सहित स्टेशन के अन्य तमाम प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर चर्चा की गई। अपने दौरे के अंतिम चरण में रवीन्द्र कुमार ने अशोक भवन परिसर में पौधारोपण भी किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि एनटीपीसी न केवल बिजली उत्पादन में अग्रणी है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति भी पूरी तरह समर्पित है। इस दौरान बड़ी संख्या में महाप्रबंधक और अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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