बिहार-झारखंड के सियासी संकेत: हेमंत-तेजस्वी ने परिवारवाद से बनाई दूरी, नीतीश ने लगाई मुहर, कुशवाहा की नहीं चली बिहार एक महीने पहले 20
क्षेत्रीय दलों के लिए परिवारवाद बार-बार राजनीतिक नुकसान का कारण बनता रहा है, फिर चाहे वह पश्चिम बंगाल हो, तमिलनाडु, बिहार या उत्तर प्रदेश। हालांकि हेमंत सोरेन और उमर अब्दुल्ला जैसे कुछ नेता इसके अपवाद बने हुए हैं।

परिवारवाद और क्षेत्रीय दलों का घाटा

राजनीति में परिवारवाद की सबसे बड़ी कीमत अक्सर क्षेत्रीय पार्टियों को ही चुकानी पड़ती है। यह सिलसिला कोई नया नहीं है और हाल के वर्षों में कई राज्यों में इसका असर साफ देखा गया है।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की मिसाल

ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल का सामने आया है, जहां ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने का परिणाम भुगत रही हैं। इसी तरह तमिलनाडु में एमके स्टालिन अपने बेटे उदय निधि को आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन ममता की तरह उनकी सत्ता भी समाप्त हो गई।

बिहार और उत्तर प्रदेश का हाल

बिहार में तेजस्वी यादव के लिए परिवारवाद ही परेशानी की जड़ बन गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के परिवारवाद ने अखिलेश यादव की राह में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं।

कुछ नेता बने अपवाद

इन सबके बीच जेएमएम के हेमंत सोरेन और नेशनल कान्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला जैसे नेता अपवाद रहे हैं। परिवारवाद के आरोपों के बावजूद ये नेता मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप