बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
Gen Z को लेकर सरकारी तंत्र में आया बदलाव
मौजूदा समय में जिस तरह से जेन जी (Gen Z) ने विभिन्न आंदोलनों के जरिए अपनी ताकत का एहसास कराया है, उसने तमाम राज्य सरकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि युवाओं की भागीदारी के बिना कोई भी नीति बनाना अब आसान नहीं रहा। सरकारें अब यह समझ चुकी हैं कि आज का युवा केवल फैसलों का पालन नहीं करना चाहता, बल्कि वह नीति निर्धारण की प्रक्रिया में अपनी बात रखना चाहता है। बिहार सरकार ने भी इसी बदलते दौर को भांपते हुए शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी की है। सरकार अब केवल पढ़ाई और परीक्षा के पारंपरिक ढर्रे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि छात्रों को सीधे व्यवस्था के साथ जोड़ने पर जोर दे रही है।
शिक्षा सुधार के लिए संवाद और चिंतन
बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय चिंतन शिविर में इस बदलाव की नींव रखी गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस दौरान शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने और उसे अधिक छात्र केंद्रित बनाने पर विशेष बल दिया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि शिक्षा विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को यह हर पल याद रखना चाहिए कि राज्य के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता और जिम्मेदारी है। इस प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए अब मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी सीधे छात्रों के बीच जाकर उनसे मिलेंगे। वे न केवल उनकी समस्याओं को सुनेंगे, बल्कि शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन के लिए छात्रों से सुझाव भी लेंगे ताकि व्यवस्था को युवाओं की उम्मीदों के अनुरूप ढाला जा सके।
15 अगस्त से शुरू होगी ऑनलाइन सुविधा
डिजिटल युग में शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आगामी 15 अगस्त से एक नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है। इसके माध्यम से राज्य के छात्रों को न केवल नियमित कक्षाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि वे अपनी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं और सवालों का समाधान भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। फिलहाल, इस सुविधा को सरकारी स्कूलों के चयनित मॉडल स्कूलों से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए जुलाई महीने में बिहार स्कूल लाइव क्लासेज की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर से इस डिजिटल शिक्षा पहल का उद्घाटन किया था, जिसका मूल उद्देश्य छात्रों को लाइव और इंटरैक्टिव शिक्षा का अनुभव प्रदान करना है।
परीक्षा प्रणाली में AI और तकनीक का प्रयोग
छात्रों के भविष्य और करियर से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता परीक्षा और उनके परिणामों को लेकर रहती है। इस चिंता को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने एक राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल आधारित मूल्यांकन पद्धतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों को शामिल करने पर काम करेगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाना है। तकनीक की मदद से छात्रों की तार्किक क्षमता, ज्ञान और विश्लेषण कौशल का मूल्यांकन बेहतर ढंग से किया जा सकेगा, जिससे रटने की प्रवृत्ति कम होगी और सीखने की प्रक्रिया प्रभावी बनेगी।
छात्र कल्याण के लिए नए निदेशालय की योजना
शिक्षा सुधारों को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए उन्हें लागू करने के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार का मन बनाया है। इसी क्रम में छात्रों के हितों से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से क्रियान्वित करने के लिए संबंधित विभागों में एक अलग निदेशालय का गठन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि एक समर्पित निदेशालय होने से छात्र कल्याण की योजनाओं में बेहतर तालमेल बना रहेगा और सरकार की नीतियां सीधे विद्यार्थियों तक अपनी पहुंच बना पाएंगी।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
बिहार सरकार की इन तमाम घोषणाओं का लब्बोलुआब यह है कि छात्र अब केवल शिक्षा व्यवस्था के अंतिम लाभार्थी नहीं रह जाएंगे, बल्कि वे इस पूरी प्रणाली में सुधार के एक महत्वपूर्ण भागीदार बनेंगे। यदि डिजिटल शिक्षा, AI आधारित मूल्यांकन प्रक्रिया और अधिकारियों के साथ सीधा संवाद धरातल पर सफलतापूर्वक उतरता है, तो यह बिहार के युवाओं के लिए शिक्षा के अनुभव को पूरी तरह बदल कर रख देगा। आने वाले समय में ये कदम न केवल राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाएंगे, बल्कि जेन जी की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में भी एक सकारात्मक शुरुआत साबित हो सकते हैं।
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