बिहार
एक घंटा पहले
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पटना के सबसे पुराने और ऐतिहासिक उद्यानों में गिना जाने वाला यह पार्क आज भी लोगों की चहल-पहल से आबाद रहता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी इसे शहर की शान माना जाता था और इसका नाम कुछ और हुआ करता था। अंग्रेजों ने इसे वर्ष 1916 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग के सम्मान में विकसित किया था, और आज यही उद्यान शहीद वीर कुंवर सिंह के नाम से पहचाना जाता है।
कहां है यह ऐतिहासिक पार्क
पटना जंक्शन के पास, जीपीओ गोलंबर के निकट स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क को शहर का पहला सार्वजनिक उद्यान माना जाता है। इसका निर्माण उस दौर में हुआ, जब बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर एक नया प्रांत बनाया गया था। तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर एडवर्ड अल्बर्ट गेट ने 31 जनवरी 1916 को इसका उद्घाटन किया था। स्वतंत्रता मिलने के बाद इस उद्यान का नाम 1857 की क्रांति के महानायक वीर कुंवर सिंह के सम्मान में रखा गया, और इसी कारण आज इसे शहीद वीर कुंवर सिंह आजादी पार्क के नाम से जाना जाता है।
हार्डिंग पार्क के नाम से रही पहचान
वायसराय चार्ल्स हार्डिंग ने बंगाल प्रेसीडेंसी से बिहार को अलग करने में जो भूमिका निभाई थी, उसी के सम्मान में यह उद्यान बनवाया गया था। जब वायसराय और वायसरायन हार्डिंग पटना के दौरे पर पहुंचे, उस समय पटना बिहार और उड़ीसा प्रांत की नई राजधानी बन चुका था और तभी इस पार्क का उद्घाटन किया गया। इस तथ्य का उल्लेख प्लानेट पटना म्यूजियम में रखे गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों में मिलता है। आज भी आर ब्लॉक से जीपीओ गोलंबर तक के इलाके की पहचान हार्डिंग पार्क के नाम से ही होती है।
सैर-सपाटे और सेहत का केंद्र
समय के साथ यह उद्यान मनोरंजन, टहलने और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों का बड़ा ठिकाना बन गया है। हर दिन सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग यहां टहलने, व्यायाम करने और खुली हवा में वक्त बिताने आते हैं। जिन यात्रियों की ट्रेन लेट हो जाती है, वे भी यहां कुछ सुकून भरे पल गुजारते हैं। उद्यान की हरियाली और शांत माहौल लोगों को सहज ही अपनी ओर खींच लेते हैं।
परिवार के लिए बेहतरीन पिकनिक स्पॉट
अगर आप इस वीकेंड परिवार के साथ समय बिताने की योजना बना रहे हैं, तो यह उद्यान किसी आदर्श पिकनिक स्थल से कम नहीं। छुट्टी के दिनों में यहां परिवार, दोस्त और बुजुर्ग बड़ी तादाद में नजर आते हैं। लोग बेंचों पर बैठकर बातचीत करते हैं, बच्चे खेलते हैं और युवा हरियाली के बीच तस्वीरें खिंचवाते दिखते हैं। यही कारण है कि यह स्थान हर उम्र के लोगों का पसंदीदा बना हुआ है।
बच्चों के लिए खास इंतजाम
यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष प्ले जोन तैयार किया गया है, जहां कई तरह के झूले, स्लाइड और आउटडोर गतिविधियों की व्यवस्था है। बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने के लिए भी अनेक सुविधाएं मौजूद हैं। शाम के समय यह हिस्सा बच्चों की किलकारियों से गूंज उठता है। माता-पिता भी अपने बच्चों को यहां लेकर आते हैं, ताकि वे फोन में उलझने के बजाय खुले माहौल में आनंद ले सकें।
पौधों से बनी जानवरों की आकृतियां
इस उद्यान के सबसे आकर्षक पहलुओं में से एक हैं पौधों से तैयार की गई जानवरों की आकृतियां। विशेष बागवानी तकनीक से पौधों को बाघ, शेर, हाथी और कंगारू समेत एक दर्जन से भी अधिक जानवरों का रूप दिया गया है। इन खूबसूरत आकृतियों को देखने और उनके साथ तस्वीरें लेने के लिए लोग खास तौर पर रुकते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में यह जगह सेल्फी और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच भी खासी लोकप्रिय हो चुकी है। यहां कैफेटेरिया की भी व्यवस्था है, ताकि घूमते-घूमते भूख लगने पर कुछ जलपान किया जा सके।
प्रवेश शुल्क और सुविधाएं
उद्यान में प्रवेश शुल्क बेहद किफायती रखा गया है। वयस्कों के लिए टिकट मात्र 10 रुपये और बच्चों के लिए 5 रुपये है। इसके अलावा 150 रुपये में मासिक पास, 300 रुपये में त्रैमासिक पास और 1000 रुपये में वार्षिक पास की सुविधा भी उपलब्ध है। यहां क्रिकेट, बास्केटबॉल और जिम जैसी खेल एवं फिटनेस सुविधाएं भी हैं। मार्च से अक्टूबर तक यह उद्यान सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। मॉर्निंग वॉक, व्यायाम, खेलकूद और परिवार के साथ बेहतरीन समय बिताने के लिहाज से यह पटना के सबसे पसंदीदा स्थानों में गिना जाता है।
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