पैक्स घोटाला और भू-माफिया गिरोह पर ईओयू का शिकंजा, संतोष डॉन के पटना-नालंदा ठिकानों पर एक साथ दबिश बिहार एक महीने पहले 23
आर्थिक अपराध इकाई ने पटना और नालंदा जिले में कुख्यात अपराधी एवं भू-माफिया संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन के दर्जन भर से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात अपराधी और भू-माफिया संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन के पटना और नालंदा जिले में फैले दर्जन भर से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। संतोष डॉन का नाम पटना के टॉप 10 अपराधियों में शामिल है। वह राजधानी पटना के खुसरूपुर प्रखंड के सुकरबेग चक पंचायत का पैक्स अध्यक्ष है और खुसरूपुर प्रखंड प्रमुख अंजू देवी का पति बताया जाता है।

एक साथ कई ठिकानों पर दबिश

ईओयू टीम ने खुसरूपुर के पचरुखिया, जगमाल बीघा, सुकरबेग चक, मुस्तफापुर और चौड़ा में स्थित संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन के कई ठिकानों पर एक साथ पहुंचकर घरों की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान टीम के सदस्यों ने इन घरों से कई महत्वपूर्ण कागजात भी बरामद किए हैं।

अवैध संपत्ति और पैक्स राशि गबन के आरोप

संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन 25 हजार रुपए का इनामी कुख्यात अपराधी और भू-माफिया है, जिस पर अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। फरार चल रहे इस आरोपी पर पैक्स अध्यक्ष के पद पर रहते हुए पैक्स की राशि गबन करने का भी आरोप लगा है।

बताया जाता है कि फरार आरोपी संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन मूल रूप से नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित रहुई थाना क्षेत्र के खिदरचक गांव का रहने वाला है।

कैमरे के सामने बोलने से इनकार

इस पूरे मामले पर जब मौके पर मौजूद आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने वरीय आलाधिकारियों का हवाला देते हुए कैमरे के सामने कुछ भी कहने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया। खुसरूपुर में अचानक हुई इस छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

भ्रष्टाचार पर सख्त रुख

उल्लेखनीय है कि इन दिनों बिहार में भ्रष्टाचार करने वालों के प्रति सरकार का रुख बेहद सख्त है। ऐसे तत्वों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए अपनी आय से अधिक संपत्ति जुटाई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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