बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश बने विधान परिषद सदस्य, राज्यपाल ने दी नियुक्ति को मंजूरी बिहार एक घंटा पहले 4
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को अब विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया गया है, जिसके बाद उनके मंत्री पद पर बना संवैधानिक संकट खत्म होता नजर आ रहा है।

दीपक प्रकाश बने MLC

बिहार की राजनीति से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश, जो राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं, को अब बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत किया गया है। राज्यपाल ने इस संबंध में बिहार कैबिनेट द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है। राजभवन से मिली इस मंजूरी के बाद दीपक प्रकाश आधिकारिक तौर पर बिहार विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं।

खाली सीट पर मिली नियुक्ति

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद हुआ है। देवेश कुमार ने पिछले ही हफ्ते अपनी विधान परिषद सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था, जिसके बाद यह सीट रिक्त हो गई थी। देवेश कुमार का कार्यकाल वैसे तो अगले वर्ष मार्च महीने तक था, लेकिन उनके इस्तीफे के साथ ही यह लगभग तय हो गया था कि इस रिक्त पद पर दीपक प्रकाश को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अब राज्यपाल की मुहर लगने के बाद दीपक प्रकाश की सदस्यता का रास्ता साफ हो गया है और वे जल्द ही विधान परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे।

मंत्री पद को लेकर जारी था कानूनी विवाद

दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के बाद से ही उनके पद को लेकर संवैधानिक सवाल खड़े हो रहे थे। दीपक प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद सरकार में बदलाव और इस्तीफे की स्थितियों के बीच, 7 मई 2026 को उन्होंने दोबारा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इस दौरान वे बिहार विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, जो विवाद का मुख्य कारण बना।

इस पूरे मामले को लेकर एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर आसीन रह सकता है। याचिका में यह दलील दी गई थी कि सरकार बदलने या दोबारा शपथ लेने से यह 6 महीने की संवैधानिक समय-सीमा दोबारा शुरू नहीं होती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, चुनाव आयोग और स्वयं दीपक प्रकाश से जवाब भी तलब किया था।

हालांकि, अब विधान परिषद सदस्य के रूप में मनोनयन होने के बाद दीपक प्रकाश ने अपनी सदस्यता की संवैधानिक पात्रता पूरी कर ली है। इससे उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा कानूनी खतरा भी टलता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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