बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
सीमा सुरक्षा पर हाई लेवल मीटिंग
बिहार के कई जिले नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए हैं। इन रास्तों का इस्तेमाल अक्सर अवैध घुसपैठ, नकली मुद्रा की तस्करी, मादक पदार्थों के व्यापार और अन्य गैर-कानूनी कार्यों के लिए किया जाता है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करते हैं। इन संवेदनशील मुद्दों पर विचार करने के लिए पटना के संवाद भवन में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई।
इस बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक में उप-मुख्यमंत्री विजय चौधरी, केंद्रीय जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी और बिहार सरकार के उच्च पदस्थ प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इंडो-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना और सीमावर्ती जिलों में हो रही आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसना था।
समन्वय और निगरानी पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा किसी भी कीमत पर सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता को समझते हुए सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने सभी सुरक्षा एजेंसियों को निर्देशित किया कि वे आपसी समन्वय को और बेहतर बनाएं।
बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देश इस प्रकार हैं:
- एस०एस०बी०, बिहार पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर हो सके।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने की जरूरत है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत लगाम लगाई जा सके।
- फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सीमा पार करने वाले तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
- संदिग्ध और फर्जी म्यूल बैंक खातों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा और ऐसे खातों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नशा मुक्त भारत और धार्मिक स्थलों की निगरानी
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के नशा मुक्त भारत 2029 अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के सीमावर्ती इलाकों को मादक पदार्थों की तस्करी का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशीले पदार्थों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना पंजीकरण वाले धार्मिक स्थलों की सूची तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे स्थलों की पहचान कर मौजूदा कानून के दायरे में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा बनी रहे।
मासिक समन्वय बैठकों का निर्देश
सुरक्षा व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया कि वे नियमित अंतराल पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महीने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच एक अनिवार्य समन्वय बैठक होनी चाहिए, जिसमें सीमा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि की समीक्षा की जाए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा पर जोर देते हुए यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे क्षेत्र का विकास होगा और लोग मुख्यधारा से जुड़ेंगे। बैठक के दौरान यह संदेश स्पष्ट था कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार मिलकर इंडो-नेपाल बॉर्डर को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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