BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला: EOU ने MBBS डॉक्टर मनीष को किया गिरफ्तार, 50 हजार रुपये में तय हुई थी डील
बिहार
एक घंटा पहले
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बीपीएससी TRE-3 पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट
बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की ओर से आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-3 के पेपर लीक कांड में जांच एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। एजेंसी ने इस मामले में डॉ. मनीष कुमार नामक एक MBBS डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि डॉ. मनीष इस पूरे गिरोह में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। इस ताजा गिरफ्तारी के बाद अब तक इस मामले में सलाखों के पीछे पहुंचने वाले आरोपियों की कुल संख्या 296 हो गई है।
संजीव मुखिया के बेटे से जुड़े तार
जांच एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों ने बताया कि डॉ. मनीष कुमार की भूमिका का खुलासा गहन छानबीन के बाद हुआ है। आरोपी मुख्य रूप से परीक्षा माफिया के सरगना कहे जाने वाले संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव का बेहद करीबी बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि इसी जान-पहचान और नजदीकी के चलते वह पेपर लीक गिरोह में सक्रिय हुआ और शिक्षक भर्ती परीक्षा को प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा बन गया। वह लंबे समय से गिरोह के कामकाज में सहयोग कर रहा था और अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से पास कराने का काम देख रहा था।
प्रति अभ्यर्थी 50 हजार रुपये की थी सेटिंग
आर्थिक अपराध इकाई ने अपने खुलासे में बताया है कि डॉ. मनीष कुमार ने अभ्यर्थियों के साथ मोटी रकम की डील की थी। एजेंसी का दावा है कि प्रत्येक अभ्यर्थी की सेटिंग करने के एवज में उसे 50 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुंचा देना था, ताकि वे अपनी सीट पक्की कर सकें। इसके लिए अभ्यर्थियों को एक सुरक्षित और गुप्त स्थान पर ठहराया गया था, जहां उन्हें प्रश्नपत्र रटाया गया।
हजारीबाग ले जाकर कराया था अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र याद
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, 15 मार्च 2024 को हुई TRE-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा से लगभग 2 या 3 दिन पहले डॉ. मनीष कुमार ने एक बड़ी साजिश रची। उसने पटना से एक गाड़ी रिजर्व की और करीब 30 अभ्यर्थियों को लेकर झारखंड के हजारीबाग पहुंच गया। वहां के कोहिनूर होटल में इन अभ्यर्थियों को ठहराया गया और उन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर उत्तर रटाए गए। काम पूरा होने के बाद डॉ. मनीष उन सभी अभ्यर्थियों को वहीं छोड़कर वापस पटना आ गया, ताकि वे परीक्षा के दिन निर्भीक होकर केंद्र पर पहुंच सकें और परीक्षा में सफल हो सकें।
डॉक्टर से पढ़ाई और फिर अपराध की राह
जांच में आरोपी के बैकग्राउंड को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। डॉ. मनीष कुमार ने साल 2021 में पटना के एनएमसीएच से अपनी एमबीबीएस की डिग्री पूरी की थी। अपनी पढ़ाई के बाद उसने कैमूर जिले में चिकित्सक के पद पर अपनी सेवाएं भी दीं। हालांकि, बाद में उसने सरकारी पद से इस्तीफा दे दिया और इन दिनों वह पोस्ट ग्रेजुएशन यानी पीजी की तैयारी में जुटा था। अपनी मेडिकल की पढ़ाई और डॉक्टर की गरिमा को दरकिनार कर वह शिक्षा माफियाओं के साथ मिलकर इस बड़े गोरखधंधे में शामिल हो गया।
आगे की कार्रवाई और जांच का दायरा
आर्थिक अपराध इकाई अब डॉ. मनीष कुमार से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों और नेटवर्क की पूरी परतें खोली जा सकें। एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं और किस स्तर तक यह जाल फैला हुआ है। बीपीएससी TRE-3 पेपर लीक मामला बिहार में हुई अब तक की सबसे बड़ी और चर्चित अनियमितताओं में से एक है। ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, वैसे-वैसे और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी। प्रशासन इस मामले को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
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