जेडीयू ने घोषित किए एमएलसी चुनाव के 4 उम्मीदवार, निशांत कुमार के नाम पर सबसे ज्यादा चर्चा बिहार 3 महीने पहले 51
जेडीयू ने बिहार एमएलसी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं, जिनमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी शामिल हैं। पार्टी ने 3 अति पिछड़े और 1 पिछड़े वर्ग को टिकट देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।

बिहार की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने आगामी एमएलसी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक कर दी है। इस सूची में पार्टी की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति साफ झलकती है। इस बार जेडीयू ने कुल चार चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है।

सूची में शामिल चार नाम

घोषित सूची के अनुसार निशांत कुमार, भारती मेहता, शिव रानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को पार्टी ने टिकट दिया है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार को लेकर हो रही है, क्योंकि वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र हैं।

सामाजिक प्रतिनिधित्व पर खास जोर

सूत्रों की मानें तो जेडीयू ने इस सूची को तैयार करते समय सामाजिक प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा है। पार्टी ने 3 अति पिछड़े (EBC) और 1 पिछड़े वर्ग (OBC) समुदाय से उम्मीदवारों को टिकट थमाया है, जिसे सामाजिक संतुलन की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।

उम्मीदवार और उनकी जातीय पृष्ठभूमि

  1. निशांत कुमार – कुर्मी (पिछड़ा)
  2. भारती मेहता – नोनिया (अति पिछड़ा)
  3. शिव रानी देवी प्रजापति – कुम्हार (अति पिछड़ा)
  4. ललन प्रसाद – धानुक (अति पिछड़ा)

बीजेपी भी उतार सकती है 4 उम्मीदवार

सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आ रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एमएलसी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है। बताया जा रहा है कि इस बार बीजेपी भी चार उम्मीदवार उतार सकती है, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से एक उम्मीदवार के मैदान में आने की संभावना जताई जा रही है।

इस तरह बिहार एमएलसी चुनाव को लेकर एनडीए के भीतर भी उम्मीदवारों की संख्या और सामाजिक समीकरणों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। सभी दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति को आखिरी रूप देने में लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मुकाबला और भी रोचक होने की उम्मीद है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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