बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
बिहार सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र के सुस्त प्रदर्शन को लेकर कड़ा रवैया अपना लिया है। वित्त विभाग की उच्च स्तरीय समिति ने खराब प्रदर्शन कर रहे बैंकों को साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले छह महीने में उनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया, तो उनके यहां सरकारी डिपॉजिट रखना बंद किया जा सकता है।
15 बैंक विशेष निगरानी में
एसबीआई और पीएनबी समेत कुल 15 बैंकों को विशेष निगरानी की सूची में रखा गया है। इन बैंकों के कामकाज और प्रदर्शन की लगातार समीक्षा की जाएगी, ताकि तय समय सीमा के भीतर इनकी स्थिति का आकलन किया जा सके।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
उच्च स्तरीय समिति ने राज्य की बैंकिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। इनका मकसद राज्य में कर्ज वितरण को गति देना और बैंकों को तय लक्ष्यों के अनुरूप काम करने के लिए प्रेरित करना है।
- राज्य के साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) को बढ़ाने पर जोर।
- वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से पूरा करना।
- जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से ऋण वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाना।
सरकार की सख्ती के मायने
सरकार का मानना है कि बैंकों के सहयोग के बिना राज्य में आर्थिक गतिविधियों और कर्ज आधारित विकास को रफ्तार नहीं दी जा सकती। यही वजह है कि कमजोर प्रदर्शन वाले बैंकों पर दबाव बनाने के लिए सरकारी जमा रोकने जैसा कड़ा कदम उठाने का संकेत दिया गया है।
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