बिहार मौसम: पटना और गया समेत 20 जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट, 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं बिहार 2 महीने पहले 78
बिहार में उमस भरी गर्मी के बीच मौसम विभाग ने पटना और गया समेत 20 जिलों के लिए बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है, साथ ही किसानों को धान की बुआई को लेकर विशेष सलाह दी गई है।

बिहार में मानसून के प्रवेश के बाद भी लोगों को अभी तक चिपचिपाती और उमस भरी गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं मिल सकी है। इस बीच, मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के मौसम को लेकर एक नया पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 20 जिलों के लिए मौसम का विशेष पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए चेतावनी जारी की है। इन प्रभावित जिलों में गरज और चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही हवाओं की रफ्तार काफी तेज रहने की उम्मीद है, जो 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसके अतिरिक्त, विभाग ने कई स्थानों पर आकाशीय बिजली यानी वज्रपात गिरने की भी गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम के इस बदलते तेवर को देखते हुए किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी: इन 20 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। विभाग ने विशेष रूप से 20 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। जिन जिलों के निवासियों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज
  • सीवान, सारण और सीतामढ़ी
  • बक्सर, भोजपुर और कैमूर
  • रोहतास, पटना और अरवल
  • जहाराबाद, औरंगाबाद और नवादा
  • गया, नालंदा और बेगूसराय
  • शेखपुरा और लखीसराय

दूसरी तरफ, उत्तर-पूर्वी और पूर्वी बिहार के जिलों के लिए फिलहाल मौसम विभाग की ओर से कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। राज्य के शेष 18 जिलों में आज मौसम के सामान्य बने रहने की उम्मीद है, जिससे वहां के लोगों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

तापमान में बढ़ोतरी का अनुमान और मानसून की सक्रियता

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। तापमान बढ़ने से लोगों को थोड़ी और गर्मी झेलनी पड़ सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 5 जुलाई के बाद पूरे बिहार में मानसून के पूरी तरह से सक्रिय होने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इसके बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में झमाझम और लगातार बारिश का दौर शुरू होने की पूरी उम्मीद है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से वास्तविक राहत मिल सकेगी।

राजधानी पटना और प्रमुख शहरों के मौसम का हाल

बिहार की राजधानी पटना के मौसम की बात करें तो अगले 4 दिनों तक आसमान में बादलों का डेरा बना रहेगा। इस अवधि में पटना के विभिन्न इलाकों में समय-समय पर तेज हवाओं के साथ बारिश या गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। पटना में अगले कुछ दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।

यदि पिछले दिनों के तापमान पर नजर डालें, तो शनिवार को राज्य का अधिकतम पारा 40 डिग्री सेल्सियस के नीचे ही दर्ज किया गया था। इसके बावजूद हवा में अत्यधिक नमी होने के कारण लोगों को भारी उमस का सामना करना पड़ा। शनिवार को भभुआ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा मोतिहारी, पटना, औरंगाबाद, बक्सर और गया जैसे प्रमुख शहरों में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा।

सुरक्षा के लिए मौसम विभाग की विशेष अपील

आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के कारण होने वाले खतरों को देखते हुए मौसम विभाग ने आम नागरिकों से बेहद सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने निम्नलिखित सुरक्षा उपायों को अपनाने की सलाह दी है:

  • खराब मौसम या आसमान में बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे अथवा बिजली के खंभों के पास खड़े होने से पूरी तरह बचें।
  • यदि आप खेतों में काम कर रहे हैं और अचानक मौसम बिगड़ने लगे, तो तुरंत काम रोककर किसी पक्के और सुरक्षित मकान या भवन में शरण लें।
  • वज्रपात के समय घर के भीतर रहें और बिजली से चलने वाले सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करने से परहेज करें।

किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण सलाह

हाल के दिनों में हुई वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त मात्रा में नमी उपलब्ध हो गई है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इस अनुकूल स्थिति का लाभ उठाने की सलाह दी है:

  • किसान भाई इस नमी का उपयोग कर धान की अगात (जल्दी पकने वाली) किस्मों की बुआई का काम तुरंत शुरू कर सकते हैं।
  • धान की बुआई के लिए सबसे उपयुक्त समय 10 से 15 जुलाई तक निर्धारित किया गया है।
  • फसल को बीजजनित रोगों से सुरक्षित रखने के लिए बुआई करने से पहले बीजों का फफूंदनाशी दवा से उपचार करना अत्यंत आवश्यक है।
  • जिन किसानों की धान की नर्सरी 10 से 15 दिन पुरानी हो चुकी है, उन्हें समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवारों को नियंत्रित कर लेना चाहिए।
  • जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त और पुख्ता साधन मौजूद हैं, वे मध्यम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों की रोपाई का काम भी शुरू कर सकते हैं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप