बिहार
एक घंटा पहले
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एनकाउंटर पर उठते सवाल
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि भरत तिवारी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहा था। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि भरत तिवारी ने उन पर गोली चलाई, जिसके जवाब में बल प्रयोग किया गया। अब असली सच्चाई क्या है, यह केवल एक निष्पक्ष जांच या अदालत के फैसले से ही सामने आ पाएगा।
रक्षक बनाम भक्षक का मुद्दा
इस पूरी घटना में मुख्य सवाल केवल गोली चलने का नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का है जो वर्दीधारी को रक्षक की बजाय भक्षक बना देती है। नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाली पुलिस जब खुद कानून हाथ में लेती है, तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है। इसी कारण जनता अब इस मामले में कड़े कदमों की मांग कर रही है।
साथानकुलम कस्टोडियल मर्डर केस से तुलना
सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ता इस मामले को तमिलनाडु के बहुचर्चित साथानकुलम कस्टोडियल मर्डर केस से जोड़कर देख रहे हैं। उस मामले में पुलिस की क्रूरता के कारण दो लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद मदुरै कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई थी। जनता की मांग है कि भरत तिवारी मामले में भी उसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पुलिस विभाग की साख बनी रहे और कानून का शासन सर्वोपरि रहे।
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