असम में बाढ़ का तांडव: बेघर होते लोग और पानी में डूबी उम्मीदों की 7 तस्वीरें राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
असम में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। 14 जिलों में फैले इस संकट की भयावहता को बयां करती 7 तस्वीरें और आंकड़े प्रशासन और आम लोगों के संघर्ष की कहानी कह रहे हैं।

असम में बाढ़ से मची तबाही और इंसानी संघर्ष

असम इस समय प्रकृति के भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है। राज्य के कुल 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा की चपेट में आने से अब तक 95 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले केवल 24 घंटों के भीतर ही बाढ़ ने 6 और लोगों की जान ले ली है, जिनमें बिस्वनाथ और शिवसागर जिले से दो-दो तथा गोलाघाट और मोरीगांव जिले से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। पानी के बढ़ते जलस्तर और डूबते घरों के बीच जिंदगी को बचाए रखने की जंग जारी है।

1.6 लाख लोगों का जीवन प्रभावित

बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य के 14 जिलों में करीब 1.6 लाख से अधिक नागरिक प्रभावित हुए हैं। सबसे गंभीर स्थिति शिवसागर जिले में बनी हुई है, जहां अकेले 57,000 लोग जलभराव के संकट से जूझ रहे हैं। इसके अलावा गोलाघाट जिले में 34,000 और जोरहाट जिले में 25,000 लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। प्रभावित इलाकों में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं।

प्रशासन का राहत अभियान

हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया है। वर्तमान में राज्य भर में 100 से अधिक राहत शिविर और वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में करीब 44,000 से अधिक बाढ़ पीड़ित शरण लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से शिविरों में भोजन की व्यवस्था की गई है, जिसमें चावल, दाल, नमक और सरसों का तेल जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ पीड़ितों तक पहुंचाए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने लिया जायजा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने असम का दौरा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मिलकर शिवसागर के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। केंद्रीय मंत्री ने भारी तबाही पर अपनी गहरी चिंता प्रकट की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिति सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा, लेकिन केंद्र सरकार राज्य को पूरी तरह मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।

कृषि और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

बाढ़ ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रहार किया है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 16,951 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। बिस्वनाथ और दरांग जैसे इलाकों में तटबंध टूट गए हैं, जिससे पानी की निकासी और अधिक कठिन हो गई है। सड़कों और पुलों के नष्ट होने से कई क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है, जिससे बुनियादी ढांचे को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

पशुधन पर भी भारी संकट

इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी इस बाढ़ के शिकार हुए हैं। राज्य में अब तक 35,000 से अधिक मवेशी प्रभावित हुए हैं। इनमें से करीब 8,500 पशु बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं, जिनमें से सर्वाधिक संख्या शिवसागर जिले की है। पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों को बचाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

शहरों में जलजमाव और नदियों का रौद्र रूप

बाढ़ का असर अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर शहरी केंद्रों तक पहुंच चुका है। गुवाहाटी, कामरूप और जोरहाट जैसे शहरों में जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह थम गया है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नावों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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