भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की अपील, रजिस्ट्रार को निर्देश बिहार एक दिन पहले 8
बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के समक्ष मामला रखने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और निर्देश

बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर त्वरित सुनवाई की मांग उठाई गई है। वरिष्ठ वकील विशाल तिवारी ने अदालत के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई के लिए अपील की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष रखें।

याचिका में क्या है मांग

याचिका के माध्यम से एनकाउंटर में शामिल संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही, घटना स्थल पर मौजूद रहे अधिकारियों पर भी कार्रवाई की अपील की गई है। इस याचिका में केवल बिहार के मामले ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में हुए कथित फुल और हाफ एनकाउंटर की घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी गई है।

विवाद और पृष्ठभूमि

यह मामला 17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने हथियार के साथ पुलिसकर्मियों को धमकाया और फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह घायल हुए और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और यह एक फर्जी मुठभेड़ है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें भरत तिवारी कथित तौर पर सरेंडर करते दिख रहे हैं।

मामले पर राजनीतिक हलचल

इस घटना के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी का दौर तेज है। स्थानीय नेताओं और विभिन्न दलों ने इस मुठभेड़ को संदिग्ध बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, जो उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। वर्तमान में, पुलिस अपनी जांच कर रही है और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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