बांकीपुर उपचुनाव: दस्तावेजों की कमी नहीं, बस एक छोटी सी गलती ने वीणा मानवी की उम्मीदवारी पर फेरा पानी बिहार एक महीने पहले 78
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जेजेडी प्रत्याशी वीणा मानवी का नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि नामांकन पत्र में प्रस्तावकों के जरूरी हस्ताक्षरों की कमी के चलते यह फैसला लिया गया।

बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज थी, लेकिन अब एक चौंकाने वाली खबर ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जनशक्ति जनता दल यानी JJD की उम्मीदवार वीणा मानवी उर्फ वीणा मांडवी का नामांकन पत्र निर्वाचन आयोग द्वारा खारिज कर दिया गया है। यह घटना उनके राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि नामांकन रद्द होने का कारण दस्तावेजों की भारी कमी या कोई बड़ा कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक बेहद छोटी सी तकनीकी चूक साबित हुई है।

प्रस्तावकों की संख्या में आई कमी

निर्वाचन आयोग द्वारा की गई नामांकन पत्रों की जांच यानी स्क्रूटनी प्रक्रिया के दौरान कुल 13 उम्मीदवारों के पर्चे विभिन्न तकनीकी त्रुटियों के चलते निरस्त किए गए। इस सूची में वीणा मानवी का नाम शामिल होना पार्टी के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव के लिए किसी भी क्षेत्रीय दल या निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन पत्र पर नियमों के मुताबिक कम से कम 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं।

जांच के समय जब वीणा मानवी के कागजातों को बारीकी से परखा गया, तो पता चला कि फॉर्म पर 10 की जगह केवल 9 प्रस्तावकों के ही हस्ताक्षर मौजूद थे। नियम की इसी अनदेखी के कारण चुनाव अधिकारियों ने उनके नामांकन को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया। सिर्फ एक हस्ताक्षर की कमी उनके चुनावी मैदान में उतरने के सपने के आड़े आ गई।

नामांकन रद्द होने के पीछे की अन्य प्रक्रियाएं

इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव कार्य से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के पास नामांकन खारिज करने के लिए कड़े मानक होते हैं। केवल एक हस्ताक्षर का कम होना ही नहीं, बल्कि अन्य कई कारणों से भी उम्मीदवारों का पर्चा रद्द किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:

  • हलफनामे में गलत या भ्रामक जानकारी साझा करना।
  • उम्मीदवार द्वारा अपने आपराधिक रिकॉर्ड या वित्तीय संपत्तियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाना।
  • नामांकन पत्र का अधूरा होना या निर्धारित प्रारूप का पालन न करना।
  • चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए अन्य तकनीकी और कानूनी मानकों पर खरा न उतरना।

अधिकारी ने बताया कि स्क्रूटनी के दौरान पारदर्शिता बनाए रखना आयोग की प्राथमिकता होती है, इसलिए किसी भी स्तर पर पाई गई कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चुनावी समीकरण और जेजेडी पर असर

बांकीपुर उपचुनाव के इस पूरे प्रकरण ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। कुल मिलाकर 14 उम्मीदवारों के नामांकन अब तक निरस्त हो चुके हैं, जिनमें छह निर्दलीय उम्मीदवार और विभिन्न छोटे राजनीतिक दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को चुनाव मैदान में उतारकर अपनी धाक जमाने की पूरी योजना बनाई थी। वीणा मानवी, जो कि पार्टी की महिला विंग की प्रमुख और एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं, उनके नामांकन से पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह था।

हालांकि, एक छोटे से हस्ताक्षर की लापरवाही ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब इस घटना के बाद JJD खेमे में निराशा का माहौल है और पार्टी इस महत्वपूर्ण मुकाबले से बाहर हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर एक मजबूत दावेदार का इस तरह तकनीकी आधार पर बाहर होना पूरे चुनाव की दिशा बदल सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटना के बाद क्षेत्र के चुनावी मंच पर आगे क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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