बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की राह में चक्रव्यूह, क्या भाजपा के गढ़ में फंसी जन सुराज की रणनीति? बिहार एक महीने पहले 65
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है, लेकिन अब वह खुद राजनीतिक समीकरणों के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।

चुनावी रण में प्रशांत किशोर की अग्निपरीक्षा

महाभारत के अभिमन्यु की कहानी हमें सिखाती है कि चक्रव्यूह में प्रवेश करना साहस का काम है, लेकिन उससे बाहर निकलने का रास्ता न मालूम होना बड़ी मुसीबत बन सकता है। बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव का नजारा इन दिनों कुछ ऐसा ही है। मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पहली बार खुद बतौर उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बांकीपुर जैसी सीट को चुना, जिसे भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है।

भाजपा के गढ़ में उलझी रणनीति

प्रशांत किशोर की सोची समझी रणनीति यह थी कि मुकाबला सीधे भाजपा और जन सुराज के बीच हो जाए। उनकी कोशिश थी कि इस दौरान अन्य विपक्षी दलों का समर्थन भी जुटाया जाए। इस दिशा में उन्होंने काफी मेहनत भी की, लेकिन जैसे ही उन्होंने उम्मीदवार के रूप में मैदान में कदम रखा, स्थिति बदलती नजर आई। अब उनके सामने ऐसी राजनीतिक घेराबंदी तैयार हो गई है, जिसमें वह स्वयं उलझते हुए दिख रहे हैं। देखना यह है कि क्या वह इस चक्रव्यूह को भेद पाएंगे या फिर यह दांव उन पर ही भारी पड़ेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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