प्रशांत किशोर के चुनावी हलफनामे का खुलासा: दर्ज हैं 8 आपराधिक मामले, अब तक किसी में भी तय नहीं हुए आरोप बिहार एक महीने पहले 64
पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी शपथपत्र में आठ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। उन्होंने साफ किया है कि इन मामलों में न तो उन पर आरोप तय हुए हैं और न ही उन्हें कहीं दोषी माना गया है।

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की चुनावी एंट्री

बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव के लिए राजनीतिक पारा पूरी तरह से गरमा गया है। चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर, जिन्हें लोग पीके के नाम से भी जानते हैं, अब पहली बार खुद चुनावी रणभूमि में उतरकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने बांकीपुर सीट से जन सुराज के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्होंने निर्वाचन आयोग के समक्ष अपना अनिवार्य चुनावी शपथपत्र यानी एफिडेविट भी जमा कर दिया है, जिसमें उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का विवरण सार्वजनिक हुआ है।

हलफनामे में 8 लंबित आपराधिक मामलों का जिक्र

प्रशांत किशोर द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, उनके खिलाफ फिलहाल 8 आपराधिक मामले लंबित हैं। यह जानकारी खुद उन्होंने अपने एफिडेविट के माध्यम से साझा की है। निर्वाचन आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनावी मैदान में उतरने वाले हर उम्मीदवार के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपने ऊपर दर्ज सभी लंबित कानूनी मामलों का ब्योरा जनता और आयोग के सामने रखे। इसी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रशांत किशोर ने इन आठों मुकदमों की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह भी उल्लेख किया है कि इन तमाम मामलों में अब तक किसी भी न्यायालय की ओर से उन पर आरोप तय नहीं किए गए हैं और न ही वे किसी भी मामले में दोषी करार दिए गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि ये सभी मामले अभी कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं और किसी भी मामले में अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।

किन इलाकों में दर्ज हैं ये मामले

जन सुराज पार्टी द्वारा जारी फॉर्म C-7 में उन क्षेत्रों का विवरण दिया गया है जहां ये मामले दर्ज हुए हैं। प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज मामले मुख्य रूप से पटना के गांधी मैदान, सचिवालय, पीरबहोर और सहरसा सदर थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं। इन थानों के अलावा, पटना, बेतिया और मुजफ्फरपुर की अदालतों में भी तीन शिकायत वाद लंबित चल रहे हैं। एफिडेविट की बारीकियों पर गौर करें तो पता चलता है कि ये मामले कुल 31 धाराओं के अंतर्गत दर्ज किए गए हैं। इन सभी मुकदमों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत देखा जा रहा है, और अब तक किसी भी मामले में कानूनी तौर पर प्रशांत किशोर के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।

जन सुराज ने दी उम्मीदवार बनाने की सफाई

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई थी कि स्वच्छ राजनीति और बदलाव का वादा करने वाली पार्टी जन सुराज ने आखिरकार आठ आपराधिक मामलों वाले व्यक्ति को टिकट क्यों दिया। इस सवाल का जवाब देते हुए पार्टी ने स्थिति साफ की है। जन सुराज का कहना है कि प्रशांत किशोर पर दर्ज अधिकांश मामले जनहित के मुद्दों को उठाने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने के दौरान दर्ज किए गए हैं। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि ये मुकदमे किसी भी तरह के नैतिक अपराध, भ्रष्टाचार या व्यक्तिगत स्वार्थ से नहीं जुड़े हैं। पार्टी ने प्रशांत किशोर के व्यापक संगठनात्मक अनुभव, उनके नेतृत्व क्षमता और बिहार पदयात्रा के दौरान जनता से मिले अपार समर्थन को उनके चुनाव लड़ने का आधार बताया है। जन सुराज के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों की भी प्रबल इच्छा थी कि प्रशांत किशोर इसी सीट से अपनी चुनावी पारी की शुरुआत करें।

क्या कहते हैं निर्वाचन आयोग के नियम

भारत निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी राजनीतिक दल का कोई उम्मीदवार ऐसे आपराधिक मामलों का सामना कर रहा है जो अभी अदालतों में विचाराधीन हैं, तो उस दल की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इन मामलों को सार्वजनिक करे। इसी व्यवस्था के तहत जन सुराज ने फॉर्म C-7 का उपयोग करते हुए यह जानकारी जनता के बीच रखी है। इस फॉर्म के माध्यम से पार्टी ने न केवल लंबित मामलों का खुलासा किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे उम्मीदवार को टिकट देने के पीछे की उनकी मंशा क्या है। चुनावी पारदर्शिता के लिए अपनाई जाने वाली इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाताओं को उनके उम्मीदवार के अतीत और कानूनी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराना है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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