बांकीपुर उपचुनाव पर आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी का बड़ा बयान, कहा प्रशांत किशोर का पलड़ा है भारी बिहार एक महीने पहले 62
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के समीकरणों को लेकर आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है। उन्होंने अपनी टिप्पणी में जन सुराज के प्रशांत किशोर की बढ़ती मजबूती और प्रमुख दलों की रणनीतियों पर सवाल उठाए हैं।

बांकीपुर उपचुनाव का बदलता समीकरण

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने हलचल पैदा कर दी है। इस हाई प्रोफाइल सीट को लेकर राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का पक्ष मजबूत नजर आ रहा है। उन्होंने भाजपा और महागठबंधन, दोनों ही मुख्य गठबंधनों की चुनावी तैयारियों और उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भाजपा के गढ़ में चुनौती

शिवानंद तिवारी का मानना है कि बांकीपुर लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का एक अभेद्य किला रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि नवीन किशोर और उसके बाद नितिन नवीन लगातार इस क्षेत्र से जीत दर्ज करते रहे हैं। हालांकि, तिवारी के अनुसार इस बार हवा का रुख कुछ और ही इशारा कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया है कि जमीनी हकीकत पहले जैसी नहीं रही और बांकीपुर में चुनावी गणित पूरी तरह से बदलता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे लंबे समय से कब्जा जमाए बैठे दल के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं।

महागठबंधन की रणनीति पर सवाल

आरजेडी के इस अनुभवी नेता ने अपने ही गठबंधन की कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी और चिंता जाहिर की है। शिवानंद तिवारी ने कहा कि महागठबंधन ने एक ऐसी महिला उम्मीदवार पर दोबारा भरोसा जताया है, जो पिछला चुनाव हार चुकी थीं। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि चुनाव प्रचार के सबसे निर्णायक समय में महागठबंधन का शीर्ष नेतृत्व विदेश दौरे पर है। तिवारी का मानना है कि जब पार्टी के बड़े नेता चुनाव को गंभीरता से नहीं लेते और प्रचार को प्राथमिकता नहीं देते, तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के उत्साह और मतदाताओं के भरोसे पर पड़ता है।

भाजपा के प्रत्याशी चयन पर टिप्पणी

केवल महागठबंधन ही नहीं, बल्कि शिवानंद तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया की भी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा ने पहले घोषित उम्मीदवार को बीच में ही बदलकर नए चेहरे को मैदान में उतारा, वह हैरान करने वाला है। उनके अनुसार, बांकीपुर जैसे प्रबुद्ध मतदाताओं वाले प्रतिष्ठित क्षेत्र में इस तरह की अव्यवस्था और बदलाव भाजपा जैसी संगठित और अनुशासित पार्टी से अपेक्षित नहीं थे। यह कदम पार्टी की आंतरिक तैयारी पर कई तरह के प्रश्न चिन्ह खड़े करता है।

प्रशांत किशोर की रणनीतिक बढ़त

शिवानंद तिवारी ने प्रशांत किशोर की क्षमता का जिक्र करते हुए लिखा कि वह बिना सोचे समझे मैदान में नहीं उतरे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी ताकत उनका चुनावी रणनीति और राजनीतिक प्रबंधन का दशकों पुराना अनुभव है। वे विभिन्न राज्यों में चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभा चुके हैं और बांकीपुर जैसी सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला उन्होंने निश्चित रूप से गहन अध्ययन और राजनीतिक आकलन के बाद ही लिया होगा। तिवारी का कहना है कि भले ही भाजपा इस सीट पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करती रही है, लेकिन बड़े राजनीतिक बदलाव अक्सर ऐसी ही साहसी और जोखिम भरी शुरुआत से होते हैं।

बिहार की राजनीति पर प्रभाव

शिवानंद तिवारी का विश्लेषण है कि प्रशांत किशोर इस चुनाव को महज एक स्थानीय मुकाबला नहीं रहने देना चाहते। वे इसे राज्य सरकार के खिलाफ एक जनमत संग्रह के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव जीतने में कामयाब होते हैं, तो इसका असर केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा और विपक्ष की राजनीति में नए समीकरण जन्म ले सकते हैं। हालांकि, अंत में तिवारी ने यह भी जोड़ा कि यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन है, जो एक पुराने कार्यकर्ता के अनुभव पर आधारित है, न कि किसी आधिकारिक सर्वे पर।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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