बूथ पर पर्ची बांट रहे थे नीरज कुमार सिन्हा, अचानक आया BJP का फोन और बदल गई पूरी तस्वीर बिहार एक महीने पहले 69
बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने एक साधारण कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को टिकट देकर सबको चौंका दिया है। टिकट मिलने की खबर उन्हें तब मिली जब वह जमीन पर उतरकर पार्टी का काम संभाल रहे थे।

बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी का बड़ा उलटफेर

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस हाई प्रोफाइल सीट पर बीजेपी ने आखिरी मौके पर एक ऐसा दांव खेला है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। पार्टी ने 32 वर्षीय नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित किया है। नीरज कुमार सिन्हा को यह मौका तब मिला जब किसी ने इसकी उम्मीद नहीं की थी। दिलचस्प बात यह है कि जब उन्हें टिकट मिलने की सूचना मिली, तब वह किसी बंद कमरे में बैठक नहीं कर रहे थे, बल्कि बूथ पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी पर्चियां बांट रहे थे।

कैसे बदली नीरज कुमार सिन्हा की किस्मत

बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए बीजेपी ने पहले अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन, अभिषेक बंटी द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद अचानक समीकरण बदल गए। जैसे ही यह खबर आई, पार्टी नेतृत्व ने तत्काल प्रभाव से नया उम्मीदवार चुनने की कवायद शुरू की। इसी बीच, नीरज कुमार सिन्हा को पार्टी की तरफ से एक फोन आया। नीरज ने बताया कि शुरू में उन्हें समझ ही नहीं आया कि मामला क्या है, क्योंकि उनसे तुरंत प्रदेश कार्यालय पहुंचने को कहा गया था। जब वह पार्टी मुख्यालय पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। इसके बाद प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें जीत के लिए बधाई दी।

सपने में भी नहीं था खयाल

उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए नीरज कुमार सिन्हा काफी भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि पार्टी उनके जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता को इतनी महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित सीट से चुनाव लड़ने का मौका देगी। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान करार दिया है। नीरज ने आगे कहा कि बीजेपी में काम करने वाले छोटे से छोटे कार्यकर्ता का भी सम्मान होता है और यह इस बात का सबूत है कि पार्टी जमीन पर मेहनत करने वालों को हमेशा आगे बढ़ाती है।

नेतृत्व का जताया आभार

नीरज कुमार सिन्हा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और तमाम वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी उन पर सौंपी है, वह उस पर पूरी तरह से खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल एक टिकट नहीं है, बल्कि पार्टी के प्रति उनके समर्पण की परीक्षा है जिसे वे पूरी निष्ठा के साथ पूरा करेंगे।

जमीनी कार्यकर्ता से उम्मीदवार तक का सफर

नीरज कुमार सिन्हा की छवि एक सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता की रही है। वह लंबे समय से संगठन की मजबूती के लिए कार्य कर रहे हैं। इससे पहले वह दो बार मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। संगठन के भीतर उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ उनके मधुर संबंधों को देखते हुए ही शीर्ष नेतृत्व ने उन पर दांव लगाने का फैसला किया है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विरासत

नीरज कुमार सिन्हा का राजनीति से जुड़ाव नया नहीं है। उनका परिवार वर्षों से जनसंघ और बीजेपी की विचारधारा का वाहक रहा है। उनके चाचा जनसंघ के दौर में एक बहुत सक्रिय कार्यकर्ता थे और संगठन को खड़ा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके योगदान को देखते हुए ही उस क्षेत्र के संगठन का नाम नरेंद्र भारती मंडल रखा गया था। आज संयोग देखिए कि उसी मंडल का नेतृत्व खुद नीरज कुमार सिन्हा कर रहे हैं, जो उनकी संगठनात्मक क्षमता को दर्शाता है।

मुकाबला होगा बेहद दिलचस्प

बांकीपुर की लड़ाई अब काफी दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। बीजेपी ने किसी बड़े चेहरे को उतारने के बजाय अपने एक समर्पित कार्यकर्ता को चुनाव मैदान में उतारा है, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। अब नीरज कुमार सिन्हा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के इस गढ़ को सुरक्षित रखने की है। उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव के रण में जीत दर्ज करनी है। मैदान में उनका मुकाबला मुख्य रूप से आरजेडी की रेखा गुप्ता और जनसुराज के प्रशांत किशोर जैसे दिग्गजों से होने वाला है। देखना यह होगा कि क्या नीरज का यह जमीनी जुड़ाव उन्हें इस बड़ी जीत तक पहुंचा पाता है या नहीं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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