राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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नागरिकता पर छिड़ी नई बहस
हाल ही में विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक स्पष्टीकरण ने देश की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, इसे किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंतिम या अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद इंडी गठबंधन के नेताओं और असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष इसे एनआरसी लागू करने की दिशा में एक कदम के रूप में देख रहा है और सरकार पर सवाल उठा रहा है कि यदि पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं, तो आखिर एक भारतीय अपनी पहचान कैसे साबित करेगा।
कानूनी वास्तविकता और अदालत का रुख
यह विवाद पहली बार नहीं उठा है और न ही यह नियम नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय पासपोर्ट का जारी होना पासपोर्ट एक्ट 1967 के नियमों के तहत आता है, जबकि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता एक्ट 1955 के अनुसार होता है। साल 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट, आधार या जन्म प्रमाण पत्र अकेले किसी की नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उस मामले में अदालत ने उन चार बांग्लादेशी नागरिकों की सजा बरकरार रखी थी, जिनके पास भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड होने के बावजूद उनके पास वैध नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण नहीं थे।
फर्जी दस्तावेजों का खतरा
सरकार की ओर से नागरिकता के कड़े मानदंडों के पीछे सबसे बड़ा कारण दस्तावेजों के फर्जीवाड़े का रैकेट है। देश में फर्जी पासपोर्ट, वोटर आईडी और जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं। हालिया वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिनमें विदेशियों ने धोखाधड़ी से भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों और कानून के तहत केवल एक कार्ड को नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि इनका दुरुपयोग करना आसान है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का तर्क
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाकर देश में एक तरह का डर पैदा कर रही है। कांग्रेस और टीएमसी जैसे दलों के नेताओं का कहना है कि सरकार धीरे-धीरे सभी वैध दस्तावेजों को खारिज कर रही है, जिससे भविष्य में नागरिकों को अपनी पहचान साबित करने में मुश्किल होगी। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी का मानना है कि एनआरसी (NRC) जैसे कदम से एक ऐसा पुख्ता सिस्टम तैयार हो सकता है जहां नागरिकता को लेकर कोई संशय न रहे और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लग सके।
मुख्य बिंदु:
- पासपोर्ट एक्ट 1967 का संबंध केवल यात्रा दस्तावेजों से है।
- नागरिकता एक्ट 1955 ही भारतीय नागरिकता तय करने का एकमात्र कानूनी आधार है।
- अदालतों ने भी कई बार स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का 100 प्रतिशत सबूत नहीं है।
- देश भर में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट और पासपोर्ट रैकेट पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग करती हैं।
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