परम एकादशी 2026: 11 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग में रखें व्रत, पूजा के समय अवश्य सुनें यह कथा तभी मिलेगा पूर्ण पुण्य धर्म एक महीने पहले 22
हर तीन साल में एक बार आने वाला परम एकादशी व्रत इस बार 11 जून गुरुवार को है और पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। मान्यता है कि बिना व्रत कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है।

इस वर्ष परम एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। यह एकादशी अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ने के कारण हर तीन साल में केवल एक बार आती है। इस बार खास बात यह है कि परम एकादशी के दिन पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

व्रत का महत्व और लाभ

शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति परम एकादशी का व्रत रखकर विधिपूर्वक भगवान श्रीहरि की आराधना करता है, उसे दुख और दरिद्रता से छुटकारा मिलता है। साथ ही धन, धान्य, यश और कीर्ति में निरंतर वृद्धि होती है।

इस व्रत की पूजा तभी सम्पूर्ण मानी जाती है जब साधक परम एकादशी व्रत कथा को सुने या पढ़े। मान्यता है कि कथा श्रवण के बिना व्रत अधूरा रह जाता है, इसलिए पूजा के समय कथा अवश्य सुननी या पढ़नी चाहिए, तभी व्रत का पूर्ण फल और पुण्य प्राप्त होता है।

परम एकादशी व्रत कथा

पौराणिक प्रसंग के अनुसार एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाले इस एकादशी व्रत तथा इसके महत्व के बारे में बताने का आग्रह किया।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि इस एकादशी को परम एकादशी अथवा पुरुषोत्तमी एकादशी कहा जाता है। उन्होंने समझाया कि इस व्रत को करने से पाप, रोग, दोष और कष्ट आदि से मुक्ति मिलती है, व्यक्ति के धन और वैभव में बढ़ोतरी होती है तथा जीवन के अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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