पति की पीठ पर सवार होकर जनसुनवाई पहुंची दिव्यांग महिला, कलेक्टर से बोली- 10 साल से न राशन मिला, न किसी योजना का लाभ मध्य प्रदेश एक महीने पहले 52
पन्ना जिले के गौरा गांव की दिव्यांग महिला नीलू राजा अपने पति की पीठ पर बैठकर बच्चों संग जनसुनवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचीं और कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा सुनाई। उनका आरोप है कि बीते 10 वर्षों से न उन्हें राशन मिला और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ।

मध्य प्रदेश के पन्ना कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक मार्मिक दृश्य सामने आया। गौरा गांव के रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह अपनी दिव्यांग पत्नी को पीठ पर बैठाकर कलेक्टर से फरियाद लगाने पहुंचे। दिव्यांग महिला ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से उन्हें न तो राशन मिल रहा है और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ मिल पाया है।

राशन कार्ड बदलने का आरोप

गौरा गांव की दिव्यांग महिला नीलू राजा अपने पति पुष्पेंद्र सिंह की पीठ पर बैठकर बच्चों के साथ जनसुनवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचीं। रोती-बिलखती महिला ने कलेक्टर उषा परमार को बताया कि उनका अति गरीबी रेखा का राशन कार्ड पंचायत के कर्मचारियों ने गरीबी रेखा में बदल दिया।

उन्होंने बताया कि आज तक उन्हें राशन पर्ची नहीं मिली, जिसके चलते बीते 10 वर्षों से परिवार को राशन नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, परिवार को प्रधानमंत्री आवास और शौचालय समेत किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। गांव में भी रोजगार का कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

चलने-फिरने में असमर्थ हैं पीड़िता

नीलू राजा ने कलेक्टर को बताया कि वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं और भोपाल एम्स में किडनी का इलाज करा रही हैं। परिवार की आर्थिक हालत इतनी कमजोर है कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

महिला ने सरपंच और सचिव पर शिकायतें न सुनने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि पंचायत से लेकर जनपद, जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट और सीएम कार्यालय तक अपनी पीड़ा पहुंचाई, लेकिन आज तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।

व्यथा सुनाते भावुक हुईं महिला

जनसुनवाई में अपनी आपबीती बताते हुए नीलू राजा भावुक हो गईं। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर उषा परमार ने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया और पीड़िता को राशन पर्ची बनवाने तथा पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद इस बार काम होने की उम्मीद लिए परिवार अपने घर लौट गया।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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