हरियाणा
एक महीने पहले
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हरियाणा के पलवल जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां के मुख्य सरकारी अस्पताल यानी डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल में प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने मरीजों की सुरक्षा को सीधे तौर पर खतरे में डाल दिया। अस्पताल में प्रसव के लिए आई एक महिला के ऑपरेशन के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई, जिसके बाद वहां मौजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। इस घटना का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन और बिजली व्यवस्था के दावों पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
अंधेरे में डूबा ऑपरेशन थिएटर: डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च का लिया सहारा
यह पूरा मामला गुरुवार रात करीब 10 बजे का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में एक गर्भवती महिला का बेहद संवेदनशील ऑपरेशन चल रहा था। इसी दौरान अचानक पूरे अस्पताल की बत्ती गुल हो गई और ऑपरेशन थिएटर में पूरी तरह से अंधेरा छा गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल में मौजूद बिजली का बैकअप सिस्टम और जनरेटर भी इस आपातकालीन स्थिति में काम नहीं कर सके।
ऑपरेशन की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों के पास इसे अधूरा छोड़ने का कोई विकल्प नहीं था। मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टरों और वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने तुरंत अपने-अपने मोबाइल फोन निकाले और उनकी फ़्लैशलाइट ऑन की। इस तरह डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी के सहारे किसी तरह सर्जरी को पूरा किया। इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों और आपदा प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
सुविधाएं कागजों पर बढ़ीं, पर जमीनी हकीकत जस की तस
पलवल के इस जिला नागरिक अस्पताल में व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से कागजी तौर पर बड़े कदम उठाए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां अभी भी बदहाल हैं।
- साल 2024 में इस नागरिक अस्पताल की क्षमता को 100 बेड से बढ़ाकर 200 बेड कर दिया गया था।
- अस्पताल को निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष डेडिकेटेड पावर लाइन से भी जोड़ा गया है।
- इन तमाम दावों और बड़े बजट के बावजूद अस्पताल में बार-बार बिजली कटने और बैकअप सिस्टम के पूरी तरह ठप हो जाने की समस्या बनी हुई है।
इतनी बड़ी क्षमता वाले जिला अस्पताल में बैकअप सिस्टम का अचानक फेल होना यह दर्शाता है कि मरीजों के जीवन को कितनी लापरवाही से लिया जा रहा है।
जांच के घेरे में अस्पताल प्रशासन: होगी सख्त कार्रवाई
पलवल का यह मुख्य अस्पताल जिले की एक बड़ी आबादी के इलाज का एकमात्र सहारा है। आंकड़ों के अनुसार:
- अस्पताल में रोजाना ओपीडी और अन्य इलाज के लिए करीब 2000 से 3000 मरीज आते हैं।
- अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में हर महीने करीब 25 से 30 गंभीर सर्जरी की जाती हैं।
इस बेहद गंभीर घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। मामले पर सफाई देते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संजय सिंह ने कहा कि यह पूरा मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने इस बात की गहनता से जांच करने के आदेश दिए हैं कि आखिर ऑपरेशन के दौरान ऑपरेशन थिएटर की बिजली कैसे चली गई और पावर बैकअप ने काम क्यों नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में अस्पताल प्रशासन या तकनीकी स्टाफ की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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