पलामू का मास्टर सोबरन मांझी जिला पुस्तकालय बनेगा हाई-टेक मॉडल लाइब्रेरी, युवाओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं झारखंड एक घंटा पहले 2
झारखंड के पलामू जिले में स्थित मास्टर सोबरन मांझी जिला पुस्तकालय को नेशनल मिशन लाइब्रेरी योजना के तहत एक आधुनिक मॉडल लाइब्रेरी में बदला जा रहा है। इस परियोजना के लिए 87 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है, जिससे छात्रों के लिए कैफेटेरिया और केबिन जैसे संसाधन जुटाए जाएंगे।

पलामू के विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात

झारखंड के पलामू जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और शिक्षा प्रेमियों के लिए एक खुशखबरी है। मेदिनीनगर स्थित मास्टर सोबरन मांझी जिला पुस्तकालय को अब एक आधुनिक मॉडल लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। लंबे समय से यह पुस्तकालय छात्रों के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन बढ़ते हुए विद्यार्थियों की संख्या और आधुनिक संसाधनों की मांग को देखते हुए सरकार ने इसके कायाकल्प का फैसला लिया है। नेशनल मिशन लाइब्रेरी के अंतर्गत चयनित इस पुस्तकालय को नई पहचान देने के लिए 87 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि मंजूर की गई है। इस बजट का उद्देश्य छात्रों को एक ऐसा शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है जो तकनीकी रूप से सक्षम और सुविधापूर्ण हो।

भवन निर्माण और सिविल कार्य पर जोर

पुस्तकालय के कायाकल्प को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई है। जिला पुस्तकालय के अध्यक्ष मंजीत कुमार सिन्हा के अनुसार, मंजूर की गई 87 लाख रुपये की राशि में से सबसे बड़ा हिस्सा भवन निर्माण और बुनियादी सिविल कार्यों पर खर्च किया जाएगा। करीब 50 लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय में आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण का काम होगा। इसके अलावा, छात्रों के लिए एक आधुनिक कैफेटेरिया और एक खुला रीडिंग सेक्शन यानी ओपन रीडिंग एरिया तैयार किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि छात्रों की सुविधा के लिए यहाँ केबिन सिस्टम भी लगाया जाएगा। इन केबिनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों को हर तरह की सुविधा मिले, जिसमें मोबाइल या लैपटॉप चार्ज करने के लिए चार्जिंग पॉइंट की व्यवस्था भी शामिल है।

आईटी और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार

आधुनिक युग की जरूरतों को समझते हुए इस मॉडल लाइब्रेरी में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। पुस्तकालय के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित 87 लाख रुपये के बजट में से 30 लाख रुपये केवल सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सुविधाओं पर खर्च करने का निर्णय लिया गया है। इस निवेश का मुख्य हिस्सा आरएफआईडी (RFID) सिस्टम लगाने में जाएगा। यह तकनीक न केवल पुस्तकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि किताबों के रिकॉर्ड का बेहतर प्रबंधन करने और पुस्तकालय की दैनिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित रूप से संचालित करने में भी सहायक साबित होगी। इस प्रणाली से लाइब्रेरी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आएगी।

दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रावधान

मॉडल लाइब्रेरी योजना को समावेशी बनाने के लिए प्रशासन ने दिव्यांग विद्यार्थियों का विशेष ध्यान रखा है। पुस्तकालय में सभी वर्ग के छात्रों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 5 लाख रुपये की विशेष राशि आवंटित की गई है। इस धन का उपयोग दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने और उनके अनुकूल ढांचा तैयार करने में किया जाएगा, ताकि उन्हें पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

आउटरीच और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा

पुस्तकालय को केवल किताबों का संग्रह न रखकर एक जीवंत शैक्षिक केंद्र बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत 2 लाख रुपये की राशि आउटरीच कार्यक्रमों के लिए आरक्षित की गई है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों और पाठकों को पुस्तकालय के साथ जोड़ना है। इसके माध्यम से युवाओं में पठन-पाठन की आदतों को बढ़ावा देने के साथ ही विभिन्न शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन और पुस्तकालय प्रबंधन की इस महत्वाकांक्षी पहल से पलामू के मेधावी युवाओं को अपनी पढ़ाई के लिए अब एक विश्वस्तरीय वातावरण मिलने की पूरी उम्मीद है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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