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एक घंटा पहले
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कराची की हवा में फैली अजीब सी गंध
बुधवार की सुबह कराची के निवासियों के लिए एक बेहद असहज अनुभव के साथ शुरू हुई। जब लोग अपनी नींद से जागे तो उन्हें हवा में एक बहुत ही तीखी और मछली जैसी सड़ी हुई बदबू महसूस हुई। यह दुर्गंध मुख्य रूप से समुद्र तटीय इलाकों के करीब शुरू हुई और देखते ही देखते शहर के कई अन्य हिस्सों में भी फैल गई। सुबह-सुबह इस तरह की दुर्गंध से लोग काफी परेशान हो गए और हर तरफ यही चर्चा थी कि आखिर वातावरण में यह गंध कहाँ से आ रही है। स्थानीय लोगों के बीच यह डर और जिज्ञासा का विषय बन गया कि शहर की हवा में अचानक यह बदलाव क्यों आया।
वैज्ञानिक कारण और फाइटोप्लैंकटन का प्रभाव
इस मामले पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई रहस्यमयी घटना नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बदबू के लिए मुख्य रूप से समुद्र में मौजूद फाइटोप्लैंकटन जिम्मेदार हैं। ये अत्यंत सूक्ष्म समुद्री जीव होते हैं जिन्हें सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान के समुद्री संसाधन सलाहकार मुहम्मद मोज्जम खान के अनुसार, मानसून के दौरान समुद्र में इनकी संख्या में भारी बढ़ोतरी हो जाती है।
जैसे ही सितंबर के मध्य में मानसून का दौर समाप्त होने की ओर बढ़ता है, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में कई बदलाव आते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद फाइटोप्लैंकटन मरने लगते हैं और सड़ने की प्रक्रिया से गुजरते हैं। इसी सड़न के कारण हवा में एक तीव्र और असामान्य दुर्गंध पैदा होती है, जिसे समुद्र के पास रहने वाले लोग स्पष्ट रूप से महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी बदबू को आम लोगों ने मछली की गंध जैसा बताया है।
समुद्री पारिस्थितिकी में फाइटोप्लैंकटन का महत्व
फाइटोप्लैंकटन समुद्र की ऊपरी सतह से लगभग 100 मीटर की गहराई तक पाए जाते हैं, जहाँ तक सूरज की रोशनी आसानी से पहुँच पाती है। ये जीव समुद्री भोजन श्रृंखला और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुहम्मद मोज्जम खान ने स्पष्ट किया कि यह कोई असामान्य प्राकृतिक घटना नहीं है। कराची में इससे पहले वर्ष 2024 में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई थी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्राकृतिक रूप से यह गंध आने वाले कुछ दिनों में धीरे-धीरे कम हो जाएगी और हवा साफ हो जाएगी।
मौसम की मार और हवा का रुख
केवल फाइटोप्लैंकटन का सड़ना ही समस्या की एकमात्र वजह नहीं है। मौसम विभाग के जानकारों और जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञों का मानना है कि उस समय की मौसमी स्थितियाँ भी इस बदबू को शहर के भीतर तक लाने और बनाए रखने में सहायक रहीं। पाकिस्तान मौसम विभाग के प्रवक्ता अंजुम नजीर जैगम और जलवायु विशेषज्ञ फातिमा यामिन ने बताया कि भारत के जामनगर तट के करीब बना कम दबाव का क्षेत्र कराची में हवाओं के प्रवाह को पूरी तरह से प्रभावित कर रहा था।
इसके साथ ही वायु प्रदूषण के कारण शहर में स्मॉग की स्थिति भी बनी हुई थी। इन दोनों कारकों ने मिलकर बदबूदार हवा को शहर के विभिन्न इलाकों में फैलने और रुकने के लिए एक वातावरण तैयार कर दिया। अंजुम नजीर जैगम ने उम्मीद जताई कि जैसे ही समुद्री हवाओं की गति सामान्य होगी और दिशा बदलेगी, शाम तक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
पुराने अनुभवों से सबक
यह पहला मौका नहीं है जब कराची के लोगों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। अक्टूबर 2024 में भी क्लिफ्टन, डीएचए, कोरंगी और सदर जैसे इलाकों के निवासियों ने ऐसी ही तीखी गंध की शिकायत की थी। उस समय पारिस्थितिकी विशेषज्ञ रफीउल्लाह ने बताया था कि हालांकि इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन लंबे समय तक धूल भरी हवाओं और ऐसी दुर्गंध के संपर्क में रहने से लोगों को साइनस जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन और विशेषज्ञ इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि लोगों को होने वाली परेशानी का जल्द समाधान हो सके।
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