श्रीनगर की आजादी का झूठा वादा नहीं चलेगा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मुनीर और शहबाज सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा विश्व एक महीने पहले 79
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सरकार विरोधी प्रदर्शन 34वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी शासकों के दमनकारी रवैये और झूठे वादों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पीओके में जारी है 34 दिनों से विरोध की लहर

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पाकिस्तान सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ वहां की जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी अब खुलेआम पाक सेना प्रमुख मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को ललकार रहे हैं। विरोध का यह सिलसिला लगातार 34वें दिन भी जारी रहा, जहां स्थानीय लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

श्रीनगर की आजादी का सपना अब पुराना हो चुका है

रविवार को रावलाकोट में आयोजित एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए आंदोलन के प्रमुख नेता जावेद इकबाल ने पाकिस्तान के दशकों पुराने प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पिछले 78 सालों से पाकिस्तानी हुकूमत कश्मीरी जनता को श्रीनगर की आजादी का सपना दिखाकर गुमराह कर रही है। अब जनता को इन झूठे वादों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। जावेद इकबाल ने आरोप लगाया कि जब जनता अपनी रोजी-रोटी के लिए आटा, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग करती है, तो जवाब में उन्हें गोलियां दी जाती हैं। सभा के दौरान जनता ने एक स्वर में घोषणा की कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा और वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

महंगाई और अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विरोध प्रदर्शन में महिलाओं समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा क्षेत्र में फैली भारी महंगाई, बिजली की आसमान छूती दरें और उन पर थोपे गए भारी टैक्स हैं। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही गिरफ्तारियों और दमनकारी नीतियों ने आग में घी डालने का काम किया है। इसी बीच, अमेरिका के वॉशिंगटन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के लोगों ने भी इस दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया जाए।

आटा मांगो तो गोलियां, सरकार का चूरन हुआ एक्सपायर

जावेद इकबाल ने पाकिस्तान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उनका 'आजादी का चूरन' एक्सपायर हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीरी जनता अब उनके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है। वहां के लोग अब मरने तक संघर्ष करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे पाकिस्तान के प्रांत के रूप में खुद को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इस अशांति के दौरान कई नागरिकों के मारे जाने और गंभीर रूप से घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं। सुरक्षा बलों द्वारा लगाए गए कर्फ्यू, सख्त प्रतिबंधों और इंटरनेट सेवाओं को बाधित किए जाने के कारण वहां की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

मुजफ्फराबाद तक मार्च की चेतावनी

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आगे की रणनीति का खुलासा कर दिया है। संगठन ने आगामी 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर एक लंबा मार्च निकालने का ऐलान किया है और सभी लोगों से इसमें भारी संख्या में शामिल होने की अपील की है। JAAC का यह भी दावा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हालिया गोलीबारी में दो और युवकों की जान गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़े तेवर दिखाते हुए लिखा कि मुजफ्फराबाद विधानसभा में बैठा हर शासक इस नरसंहार का जिम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता अपने युवाओं के हत्यारों को कभी माफ नहीं करेगी और इसका कड़ा हिसाब लिया जाएगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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