क्या सिंध के होने वाले हैं दो टुकड़े? जरदारी ने बीच में छोड़ा यूरोप दौरा, पाकिस्तान में मचा सियासी हड़कंप विश्व 3 घंटे पहले 6
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने यूरोप के कार्यक्रम को छोटा करते हुए स्वदेश लौटने का निर्णय लिया है। सिंध प्रांत के विभाजन की चर्चाओं और सेना के कथित राजनीतिक दखल के बीच पाकिस्तान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

यूरोप दौरा रद्द कर वतन लौट रहे जरदारी

पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के बादल गहरा गए हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने तय यूरोप दौरे को बीच में ही खत्म करने का बड़ा फैसला लिया है। उन्हें फ्रांस की यात्रा पर जाना था, लेकिन उन्होंने इसे अचानक रद्द कर दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति अब 8 सितंबर को सीधे ब्रिटेन से पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। इस घटनाक्रम को पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़े तूफान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

सिंध को बांटने की अटकलों से बवाल

पाकिस्तान की सियासी गलियारों में एक नया बवंडर तब खड़ा हुआ जब योजना मंत्री अहसान इकबाल ने प्रशासनिक बदलाव को लेकर एक विवादास्पद प्रस्ताव सामने रखा। उन्होंने पूरे देश को 12 से 15 नए प्रांतों में विभाजित करने की वकालत की है। इस बयान के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के खेमे में हड़कंप मच गया है। पार्टी का मानना है कि यह सीधे तौर पर उनके प्रभाव वाले क्षेत्र यानी सिंध प्रांत को विभाजित करने की एक सोची-समझी साजिश है। पीपीपी की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया गया है कि बिना किसी संवैधानिक प्रक्रिया या व्यापक राजनीतिक सहमति के सिंध के भौगोलिक स्वरूप से छेड़छाड़ करना नामुमकिन है।

बिलावल और बख्तावर की लंदन में हलचल

इस संकट के बीच, राष्ट्रपति जरदारी के बच्चे बिलावल भुट्टो और बख्तावर भुट्टो भी तुरंत लंदन पहुंचे। वहां बंद कमरों में लंबी चर्चाएं हुईं। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि सिंध में पाकिस्तानी सेना का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जो उनके पारंपरिक जनाधार को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, रणनीतिक कारणों से बिलावल और बख्तावर ने अभी एक और हफ्ता लंदन में ही रहने का फैसला लिया है ताकि आगे की कार्ययोजना पर विचार किया जा सके।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना का कनेक्शन

राष्ट्रपति जरदारी की लंदन यात्रा के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से भी मुलाकात हुई। नकवी को सेना प्रमुख आसिम मुनीर का बेहद करीबी माना जाता है। सियासी जानकारों का दावा है कि देश को छोटे राज्यों में बांटने की इस पूरी योजना के पीछे सेना प्रमुख का हाथ है। नकवी के साथ हुई उस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के मौजूदा हालात पर गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद जरदारी ने तुरंत पाकिस्तान लौटने का अंतिम निर्णय लिया।

8 सितंबर को इस्लामाबाद में क्या होगा

भले ही राष्ट्रपति कार्यालय ने फ्रांस का दौरा रद्द करने के पीछे कोई औपचारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन पर्दे के पीछे की राजनीति पूरी तरह स्पष्ट है। देश के प्रशासनिक ढांचे को बदलने की कोशिशें और सेना का बढ़ता दखल राष्ट्रपति के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें 8 सितंबर पर टिकी हैं, जब राष्ट्रपति जरदारी सीधे इस्लामाबाद पहुंचेंगे। उनके लौटने के बाद पाकिस्तान में किस तरह का सियासी बवंडर खड़ा होता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। स्थिति इतनी नाजुक है कि किसी भी समय बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप