पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी पर घमासान, मौलाना के फतवे से सरकार के दांव को झटका विश्व एक महीने पहले 69
पाकिस्तान सरकार जहां अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी को बढ़ावा दे रही है, वहीं कराची के मौलानाओं ने इसे शरिया के खिलाफ बताते हुए फतवा जारी कर दिया है।

क्रिप्टोकरेंसी पर धार्मिक पाबंदी का ऐलान

एक ओर पाकिस्तान सरकार देश की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना बना रही है, तो दूसरी ओर देश के प्रमुख उलेमाओं ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कराची स्थित जामिया दारुल उलूम के दारुल इफ्ता ने हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक सख्त फतवा जारी किया है। इस फतवे में क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह से हराम और शरिया कानून के विरुद्ध करार दिया गया है। उलेमाओं का स्पष्ट मानना है कि इस्लामी कानून के दायरे में क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी तरह से मान्य संपत्ति नहीं माना जा सकता है।

सरकार की बड़ी योजना और अंतरराष्ट्रीय डील

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की सरकार क्रिप्टोकरेंसी इकोसिस्टम को देश में स्थापित करने के लिए जोर-शोर से काम कर रही है। जनवरी 2026 में पाकिस्तान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल की सहयोगी इकाई एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज के साथ एक रणनीतिक समझौता किया था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यूएसडी1 स्टेबलकॉइन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान को आसान बनाना था।

इस समझौते के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर खुद मौजूद थे। इस उच्च-स्तरीय बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार स्टीव विटकॉफ के बेटे जैक विटकॉफ ने भी शिरकत की थी। उन्होंने पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे पाकिस्तान के भविष्य के आर्थिक लेनदेन के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा था।

फतवे का आधार और उलेमाओं का तर्क

मुफ्ती मुहम्मद तकी उस्मानी सहित पांच अन्य प्रमुख उलेमाओं द्वारा हस्ताक्षरित इस फतवे में तर्क दिया गया है कि क्रिप्टोकरेंसी कोई वास्तविक संपत्ति या जायदाद नहीं है। उलेमाओं के अनुसार, ये केवल डिजिटल अकाउंट में दिखाई देने वाले कुछ वर्चुअल नंबर हैं, जिनका कोई भौतिक आधार नहीं है। इसलिए, शरिया के सिद्धांतों के अनुसार इन्हें माल या धन का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

खरीद-बिक्री पर उठते सवाल

फतवे में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए लेनदेन को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। उलेमाओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके कोई किताब या ऑनलाइन शैक्षिक कोर्स खरीदा है, तो वह लेनदेन शरिया के हिसाब से अवैध है।

  • यदि किसी ने क्रिप्टोकरेंसी से किताब खरीदी है, तो उसे विक्रेता को वापस कर देना चाहिए। ऐसी किताब का उपयोग करना या उसे आगे बेचना भी गलत है।
  • ऑनलाइन डिजिटल कोर्स के मामले में भी यही राय दी गई है। फतवे के मुताबिक, यदि क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से कोई कोर्स खरीदा गया है, तो उसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
  • उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने मोबाइल, लैपटॉप या किसी अन्य डिवाइस से ऐसे कोर्स की सभी फाइलों को हमेशा के लिए डिलीट कर दें।

इस फतवे ने पाकिस्तान सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। एक तरफ सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अपनी पैठ बनाने के लिए यूएसडी1 जैसे स्टेबलकॉइन पर दांव लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक कट्टरपंथ का विरोध उनके पूरे डिजिटल भुगतान प्रोजेक्ट को अधर में लटका सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने इस प्रोजेक्ट पर टिकी रहेगी या उलेमाओं के दबाव के आगे इसे वापस लेगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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